नई दिल्ली/के के सलुजा/- इस उपलब्धि के लिए दिल्ली पुलिस की जितनी सराहना की जाए कम है। उस मां पर क्या बीत रही होगी जिस के दो बच्चे अनजान शहर में लापता हो गये होंगे।
दिल्ली पुलिस ने ऐसी रणनीति बनायी कि दोनों बच्चे मां को सुरक्षित सौंप दिए। उस मां की जान में जान तो आयी, उस ने तरीकों के पुल बांध दिए। दुआओं की झड़ी लगा दी।
पुलिस टीम इस की हकदार भी है। यह परिवार नेपाल से बिहार होते हुए दिल्ली आया था। इसे हैदराबाद के तिरुपति बाला जी मंदिर जाना था, अचानक एक नौ और दूसरा पां वर्षीय लापता हो गया। परिवार नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ने जा रहा था। बाजार में भारी भीड़ होने के कारण दोनों बच्चे अलग हो गये।
तीन अक्टूबर की शाम के चार बजे सदर बाजार के पुलिस बूथ को इस की सूचना मिली। जिससे पुलिस टीम सक्रिय हो गई। कुतुब चौक के पुलिस बूथ को सूचना मिली। इसके मुताबिक यह घटना दोपहर के डेढ़ बजे हुई। सूचना के मुताबिक दोनों बच्चे ठीक से हिंदी नहीं बोल पाते। यह भी पुलिस के लिए चुनौती थी। इंसपेक्टर सहदेव सिंह तोमर उस समय सदर बाजार में थे। उन्होंने बच्चे लापता होने की सूचना बाजार में प्रसारित करवा दी।
इंसपेक्टर राकेश और बाबू लाल के नेतृत्व में दो टीमें बच्चों की तलाश में और जुट गयीं। इनमें धीरेंद्र, प्रहलाद, सत वीर और अनीशा शामिल थीं। सीसीटीवी कैमरों की फुटबॉल देखी गई। बच्चों को सूचना व्हाट्सएप ग्रुप्स , आर डबल्यू एसोसिएशनों को दी गई। आखिर कार पुलिस की मेहनत रंग लायी। दोनों बच्चे नयी दिल्ली स्टेशन के बाहर मिल गये। जिसे भी इस घटना का पता चला उस ने दिल्ली पुलिस की सराहना की।


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