विश्व मातृ दूध सप्ताह के प्रथम दिन आरजेएस पीबीएच ने किया जागरूकता कार्यक्रम

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March 6, 2026

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विश्व मातृ दूध सप्ताह के प्रथम दिन आरजेएस पीबीएच ने किया जागरूकता कार्यक्रम

-दवाओं का नाम लोकभाषाओं में लिखने से रहेगा स्वस्थ जच्चा-बच्चा- डा. जोशी. -किसी भी मां का दूध समय पर बच्चे के लिए सर्वोत्तम है - आरजेएस पीबीएच वेबिनार

नई दिल्ली/ – राम-जानकी संस्थान पाॅजिटिव ब्राॅडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) द्वारा 246 वीं वेबीनार का आयोजन जोशी चिल्ड्रेन्स हाॅस्पीटल विरार मुंबई के सहयोग से संस्थापक उदय कुमार मन्ना के संयोजन में विश्व मातृ दूग्ध सप्ताह के प्रथम दिन 01 अगस्त को किया गया । स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ माधवी गुप्ता, क्लिनिकल न्यूट्रीशनिस्ट ईसा खोसला और कार्यक्रम के सह-आयोजक डा हेमंत जोशी और डा. अर्चना जोशी ने कहा कि माँ का दूध सर्वोत्तम है।  यह संदेश विश्व मातृ दूग्ध सप्ताह में  जन जन तक पहुंचे, इसके लिये 01 अगस्त 2024 को कार्यक्रम के सह-आयोजक जोशी चिल्ड्रन्स अस्पताल विरार, मुंबई से डॉ. हेमंत जोशी और डा. अर्चना जोशी
जुड़े । सफल संचालन लेखिका व कवयित्री रिंकल शर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन एडवोकेट सुदीप साहू ने किया।

ओपनिंग रिमार्क्स में डॉ अर्चना जोशी ने माँ के दूध के महत्व के विषय में बताया । डा. जोशी ने बताया कि माँ का दूध पीना बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है । स्तनपान कराना सीखें और दूसरों को सिखायें । उन्होंने उदाहरण दिया कि ब्राजील में जन्म देने वाली माँ के अलावा  घर में मौजूद अन्य मौसी-बुआ बच्चे को अपना दूध पिला देती हैं । इससे  बच्चे के पोषण में कोई कमी नहीं होती है । उन्होंने कहा कि बच्चे के जन्म के पश्चात अन्नप्राशन संस्कार में दूध के अलावा गाढ़ा पदार्थ देना शुरू करें । चार्ट के माध्यम से बच्चे को दूध पिलाने से तमाम बीमारी से बचा सकते हैं । दूध पिलाना भी राष्ट्र सेवा है । मुख्य वक्ता और सह-आयोजक डा. हेमंत जोशी ने कहा कि सरकार को जगाने के लिए एक स्वर में आवाज देनी होगी। डा. हेमंत जोशी ने कहा कि दवाओं के नाम हिंदी व भारतीय भाषाओं में होने चाहिए ।

इससे मरीजों को गलत दवा देने की समस्या खत्म होगी । डॉ. जोशी ने स्वास्थ्य की जानकारी देने के लिए अपनी लिखी किताब व पैम्फलेट का क्यूआर कोड जारी किया , जो बहुत उपयोगी है । क्लिनिकल  न्यूट्रीनिस्ट  ईशा खोसला ने कहा कि आज कल अधिकांश गर्भवती प्राकृतिक तरीके से प्रसव नहीं कराना चाहती हैं । वो चाहती हैं कि ऑपरेशन से प्रसव हो । उन्होंने प्रसव काल में अच्छे खानपान पर जोर दिया और जन्म के बाद नवजात को माँ का दूध पिलाना जरूरी बताया । माँ का दूध तमाम बीमारी से बच्चे को बचाता है.। डा. माधवी एम. गुप्ता डायरेक्टर प्रोफेसर मौलाना आजाद मेडिकल कालेज एवं लोक नायक हॉस्पिटल नई दिल्ली ने कहा कि माँ का दूध पिलाने के लिए जागरूकता जरूरी है । बच्चे को दो साल दूध जरूर पिलाना चाहिए । युवतियों को जागरूक करना चाहिये कि माँ का दूध पिलाना क्यों जरूरी है । दूध पिलाने से स्तन कैंसर की संभावना कम हो जाती है । स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (सेवानिवृत्त) ओम सपरा ने
मैटरनिटी बेनिफिट ऐक्ट 1961 पर चर्चा की।डा हेमंत जोशी और अर्चना जोशी के प्रयासों से सरकारी कार्यालयों में महिला की प्रसव काल में माता को 6 महीने की छुट्टी मिलती है और कुछ दवाईयों पर लोक भाषाओं में नाम लिखने पर मजबूर किया।

मंच संचालन कर रही रिंकल शर्मा लेखिका व कवियित्री ने बताया कि  यूनिसेफ ने विश्व मातृ दुग्ध सप्ताह 1992 में प्रारंभ किया । आरजेएस ऑब्जर्वर दीपचंद माथुर ने आजादी पर्व 11 अगस्त को आने के लिए सभी को आमंत्रित किया।  एडवोकेट संदीप साहू ने सभी डाक्टरों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया । आरजेएस पीबीएच के संस्थापक व संयोजक उदय मन्ना ने टेक्निकल टीम व सभी अतिथियों व साथियों को धन्यवाद दिया । कार्यक्रम में आर.एस कुशवाहा, नीरा अरोड़ा, आशीष रंजन

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