विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने राज्यसभा सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया

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विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने राज्यसभा सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया

अनीशा चौहान/- विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। विपक्ष का आरोप है कि राज्यसभा के सभापति पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे हैं। इसके बाद अब विपक्षी गठबंधन के नेता एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं, जिसमें कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी बातें रखीं।

‘उपराष्ट्रपति लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के पहले उपराष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद किया। खड़गे ने कहा कि उपराष्ट्रपति लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं और इस पद पर कई लोग रहे हैं, जिन्होंने अपनी निष्पक्षता के साथ कार्य किया। खड़गे ने बताया कि इतने लंबे कालखंड में किसी उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं आया, क्योंकि सभी ने निष्पक्ष तरीके से काम किया था। लेकिन आज हमें यह दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि जगदीप धनखड़ के पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण हमें यह अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ रहा है।

‘नियमों का पालन नहीं हो रहा’

खड़गे ने कहा कि वर्तमान सभापति के तहत नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जगदीप धनखड़ विपक्ष के सदस्यों को बोलने का मौका नहीं देते और उन्हें बोलने से रोकने के बजाय प्रवचन देने लगते हैं।

प्रथम उपराष्ट्रपति की निष्पक्षता को किया याद

खड़गे ने देश के पहले उपराष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 1952 में कहा था कि वे किसी पार्टी से नहीं हैं, और यह बात उनकी निष्पक्षता को दर्शाती है। खड़गे ने यह भी कहा कि आज हमें दुख के साथ यह प्रस्ताव लाना पड़ रहा है, क्योंकि सभापति ने सदन के संचालन में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है।

‘सभापति सीनियर-जूनियर का भी ख्याल नहीं रखते’

मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगे आरोप लगाया कि जगदीप धनखड़ कभी सरकार की तारीफ करते हैं और कभी खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एकलव्य बताते हैं। उन्होंने कहा कि सभापति सीनियर और जूनियर सदस्यों का भी ख्याल नहीं रखते और विपक्षी नेताओं के लिए राजनीतिक बयानबाजियां करने लगते हैं। खड़गे ने कहा कि सभापति नहीं चाहते कि सदन में चर्चा हो, और वे विपक्षी नेताओं को बोलने से रोककर खुद प्रवचन देने लगते हैं।

विपक्षी दलों का यह कदम दर्शाता है कि वे राज्यसभा में सभापति के पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ एकजुट हो चुके हैं और अब वे इस मुद्दे को संसद में उठाकर लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवाज उठा रहे हैं। अब यह देखना होगा कि इस अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में क्या कार्रवाई होती है और विपक्ष के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया होती है।

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