लोकसभा में हंगामा: गंभीर आपराधिक मामलों में नेताओं को पद छोड़ने पर केंद्र के तीन विधेयक

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लोकसभा में हंगामा: गंभीर आपराधिक मामलों में नेताओं को पद छोड़ने पर केंद्र के तीन विधेयक

नई दिल्ली/अनीशा चौहान/-    केंद्र सरकार ने 20 अगस्त 2025 को लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश किए, जिनमें प्रावधान है कि यदि कोई नेता किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होकर 30 दिन तक हिरासत में रहता है, तो 31वें दिन उसे पद से हटना या इस्तीफा देना अनिवार्य होगा। ये विधेयक हैं:

1. संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025
2. केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025
3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ये बिल पेश करते हुए कहा कि इन्हें आगे विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा जाएगा। उनका कहना था कि इन विधेयकों का उद्देश्य आपराधिक छवि वाले नेताओं को संवैधानिक पदों से हटाकर सुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

विपक्ष का तीखा विरोध
बिलों के पेश होते ही विपक्षी दलों ने लोकसभा में जोरदार विरोध किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इन बिलों को “विनाशकारी” करार दिया और कहा कि यह संविधान के मूल सिद्धांत “जब तक दोष सिद्ध न हो, तब तक निर्दोष” को कमजोर करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन विधेयकों से कार्यकारी एजेंसियों को असीमित शक्तियां मिल जाएंगी, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं।

ओवैसी और आप का आरोप
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इन विधेयकों को जनता के सरकार चुनने के अधिकार पर हमला बताया और इसे “पुलिस राज्य” की ओर बढ़ता कदम करार दिया। उनका कहना था कि इस कानून के जरिए कार्यकारी एजेंसियों को मनमानी शक्ति मिल जाएगी और किसी भी नेता को जबरन हटाया जा सकता है।
वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) नेता अनुराग ढांडा ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करती है। उन्होंने कहा कि इस कानून से निर्दोष नेताओं को भी हटाया जा सकता है, जैसे कि सत्येंद्र जैन के मामले में हुआ।

जेपीसी की भूमिका और भविष्य की राजनीति
इन विधेयकों ने राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे विपक्षी सरकारों को अस्थिर करने की साजिश बता रहा है, जबकि सरकार इसे राजनीति में नैतिकता और पारदर्शिता लाने का प्रयास मान रही है। अब यह बिल जेपीसी की जांच के बाद आगे बढ़ेंगे, और उनके निष्कर्ष भविष्य की भारतीय राजनीति पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं।

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