लंदन में जाट मेला आयोजित…….

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930  
April 14, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

लंदन में जाट मेला आयोजित…….

-खाओ चूरमा, बनो सूरमा ऑनलाइन वेबिनार कार्यक्रम में की अंतरराष्ट्रीय चूरमा दिवस मनाने की शुरुआत* -करीब 50 देशों के अप्रवासी भारतीयों ने चूरमा बनाकर की कार्यक्रम में शिरकत* -यू.के. में भारतीय मूल के काउंसलर रोहित अहलावत ने स्वयं चूरमा बनाकर इसे खिलाड़ियों में परोसकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दी उत्तर भारतीय व्यंजन को विशेष पहचान

लंदन/नई दिल्ली/- इंग्लैंड की राजधानी लंदन में सातवें अंतरराष्ट्रीय जाट मेले का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय मूल के काउंसलर रोहित अहलावत द्वारा यहां से पहले अंतरराष्ट्रीय चूरमा दिवस मनाने की शुरुआत की गई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाओ चूरमा, बनो सूरमा वेबीनार कार्यक्रम किया गया। इसमें यूरोपियन देशों सहित एशिया महाद्वीप के करीब 50 देशों से भारतीय मूल के अप्रवासी नागरिकों अपने घरों में चूरमा बनाकर अपनी सहभागिता दर्ज करवाई। वहीं यू.के. में रह रहे भारतीय मूल के काउंसलर रोहित अहलावत ने भी स्वयं अपने हाथों से चूरमा बनाकर इंग्लैंड पहुंचे अंतरराष्ट्रीय स्तर के भारतीय खिलाड़ियों के मध्य यह चूरमा परोसा और उन्हें खिलाया।

ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय वेबीनार कार्यक्रम में हिस्सा लेकर भारतीय मूल के अप्रवासी भारतीयों ने विदेशी लोगों को भारतीय पकवान चूरमा बनाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति को बढ़ावा दिया और विशेषकर हरियाणा व राजस्थान प्रांत के पारंपरिक पकवान की विशेष पहचान स्थापित करने में अपना अहम योगदान दिया। कार्यक्रम में मशहूर हरियाणवी गायक गजेंद्र फ़ौग़ाट ने शिरकत की और हरियाणवी गीतों से विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों को अपने गानों व मधुर संगीत से ओतप्रोत किया। विदेशों में बसे अप्रवासी भारतीयों ने इंग्लैंड के काउंसलर रोहित अहलावत द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चूरमा दिवस की शुरुआत करने पर बधाई देते हुए उनकी भूरी भूरी प्रशंसा की और कहा कि श्री अहलावत ने इस प्रकार का अनोखा कार्यक्रम आयोजित कर विदेशों में अपनी विशेष धाक जमाई है और उत्तर भारत के पौराणिक व्यंजन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान स्थापित की है। कार्यक्रम में मुख्य तौर पर संजय देशवाल, सुखविंदर नाहरा, सोनिया देशवाल, मैत्रेयी मलिक, नवीन नैन भालसी, विक्रम रावत, विजय राठी व सुरजीत ढाका सहित अनेक लोगों ने हिस्सा लिया।

चूरमा बनाने की विधि
गेहूं अथवा बाजरे के आटे को शुद्ध देसी घी में अपने हाथों से गूँथकर सर्वप्रथम इसकी रोटियाँ सेंकी जाती हैं फिर इन गर्म गर्म रोटियों पर बुरा, देसी खांड, चीनी अथवा शक्कर के साथ बार बार शुद्ध देसी घी डालकर इसे हाथों से बिल्कुल महीन चुरा जाता है और चुरते चुरते जब यह बिल्कुल बारीक हो जाता है तो हाथों से इसके गोलाकार आकार के लड्डू बनाए जाते हैं।

चूरमे से मिलती है ताकत
चूरमा खाने से इंसान के शरीर को ताकत मिलती है और कबड्डी, कुश्ती खिलाड़ियों एवं पहलवानों की यह पारंपरिक खुराक होती है। इसके अलावा उत्तर भारत के हरियाणा, राजस्थान व पंजाब के गावों में आम महिलायें इस पकवान को बनाती हैं और परिवार में सभी लोग मिल बैठकर खाते हैं। यह उत्तर भारत की पौराणिक शक्तिवर्धक मूल खुराक है।

अंतरराष्ट्रीय चूरमा दिवस पर आयोजित खाओ चूरमा, बनो सूरमा ऑनलाइन वेबिनार कार्यक्रम में विभिन्न देशों से हिस्सा लेते अप्रवासी भारतीय।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox