‘मिनी माता’ के नाम की रक्षा के लिए प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस ने लगाई रोक

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 10, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

‘मिनी माता’ के नाम की रक्षा के लिए प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस ने लगाई रोक

-रायपुर में विरोध से पहले रोके गए जनता कांग्रेस (जे) नेता

छत्तीसगढ़/उमा सक्सेना/-       छत्तीसगढ़ की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल मच गई जब जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी को उनके निवास स्थान से बाहर निकलने से रोक दिया गया। यह घटना राज्य के 25वें स्थापना दिवस के मौके पर हुई, जब वे राजधानी रायपुर में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल की ओर शांतिपूर्ण तरीके से जाने वाले थे। पुलिस ने उन्हें जोगी निवास, 9 सीएम हाउस रोड, सिविल लाइन्स स्थित उनके घर पर ही रोक लिया और नजरबंद कर दिया।


पुलिस ने सरकार के निर्देशों का हवाला दिया
सुबह जैसे ही अमित जोगी अपने आवास से बाहर निकलने की तैयारी कर रहे थे, सिटी एसपी रमाकांत साहू और टीआई दीपक कुमार पासवान के नेतृत्व में पुलिस बल वहां पहुंचा। जब जोगी ने पुलिस से इस कार्रवाई का कारण पूछा तो अधिकारियों ने बताया कि उन्हें “सरकार के आदेशों का पालन” करना है और किसी को भी काले वस्त्र पहनकर कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं है। बताया गया कि यह कदम किसी भी प्रकार की राजनीतिक नारेबाजी या विरोध से बचने के लिए उठाया गया।

‘मिनी माता भवन’ को लेकर विरोध की पृष्ठभूमि
इस विरोध का मुख्य उद्देश्य नए विधानसभा भवन का नाम ‘मिनी माता भवन’ रखने की मांग को लेकर था। जोगी ने पहले ही राज्य सरकार, विधानसभा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री कार्यालय को इस संबंध में एक समयसीमा दी थी, जो हाल ही में समाप्त हुई। उनका कहना था कि यदि यह मांग पूरी नहीं होती, तो वे शांतिपूर्ण ढंग से इस विषय पर ध्यान आकर्षित करने के लिए विरोध दर्ज कराएंगे।

‘यह संघर्ष छत्तीसगढ़ की आत्मा का है’ — अमित जोगी
अमित जोगी ने कहा कि उनका विरोध किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि एक नैतिक आंदोलन है जो राज्य की अस्मिता और विरासत की रक्षा से जुड़ा है। उन्होंने कहा, “आज विरोध का स्वरूप केवल प्रतीकात्मक था। हमने तय किया कि किसी भी टकराव से बचने के लिए घर पर रहकर प्रार्थना और उपवास करेंगे।”
जोगी ने आगे कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोकतांत्रिक देश में अब काले कपड़े पहनना भी अपराध माना जा रहा है। हमारा विरोध अहिंसक और संवैधानिक अधिकारों के दायरे में था।”

शांतिपूर्ण प्रतिक्रिया: पुलिसकर्मियों को मिठाई खिलाई
इस घटनाक्रम के बीच, अमित जोगी ने एक अद्भुत उदाहरण पेश किया। उन्होंने अपने घर के बाहर तैनात करीब 30 पुलिसकर्मियों को मिठाई बांटी और उनका स्वागत किया। उनके इस कदम ने तनावपूर्ण माहौल में सौहार्द का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया सत्ता के दमनकारी रवैये और विपक्ष के संयमित व्यवहार के बीच के अंतर को दिखाती है।

संविधानिक अधिकारों पर उठे सवाल
अमित जोगी ने कहा कि शांतिपूर्वक विरोध करना डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान द्वारा दिया गया मौलिक अधिकार है, और यह किसी भी लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने कहा, “हम केवल यह चाहते हैं कि सरकार जनता की बात सुने, उसे दबाए नहीं। असहमति का सम्मान ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।”

लोकतांत्रिक मूल्यों की परीक्षा
इस पूरी घटना ने राज्य में लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और राजनीतिक सहिष्णुता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि असहमति को दबाने की यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox