महाराष्ट्र में फिर से बहाल हो सकती है पुरानी पेंशन योजना?

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 13, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

महाराष्ट्र में फिर से बहाल हो सकती है पुरानी पेंशन योजना?

-’केंद्र कर रहा विचार’, अजित पवार के बयान से बढ़ी हलचल

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- महाराष्ट्र में पुरानी पेंशन योजना बहाल हो सकती है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बयान से राज्य में हलचल बढ़ गई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब उनसे पुरानी पेंशन योजना को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि योजना के खिलाफ उनका पहले का रुख बदल गया है। साथ ही उन्होंने कहा इस मामले पर वह सकारात्मक रूप से पुनर्विचार करेंगे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र भी इस पर विचार कर रहा है।

नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वेतन, पेंशन राशि के बीच संतुलन बनाना चाहती है। राज्य सरकार पर वित्त पर बोझ न पड़े इसका ध्यान रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि सीएम शिंदे, उपमुख्यमंत्री फडणवीस और मेरे बीच पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के मुद्दे को लेकर चर्चा हुई थी। साथ ही कहा कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ओपीएस के प्रति अपना विरोध जताया था, जब मैं अतीत में राज्य का वित्त मंत्री था तब मैंने भी एक सत्र के दौरान ऐसी ही बातें कही थीं। हालांकि मेरी जानकारी के मुताबिक, केंद्र इस लंबित मामले पर विचार करने के बारे में सोच रहा है।

क्या थी पुरानी पेंशन योजना?
महाराष्ट्र में कई सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग कर रहे हैं, जिसे 2005 में राज्य में बंद कर दिया गया था। बता दें कि ओपीएस के तहत एक सरकारी कर्मचारी को उसके अंतिम आहरित वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर मासिक पेंशन मिलती है। कर्मचारियों द्वारा अंशदान की कोई आवश्यकता नहीं थी। केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को वर्ष 2021 से वित्तीय लाभ मिलेगा।

क्या है नई पेंशन योजना?
नई पेंशन योजना के मुताबिक, एक राज्य सरकार का कर्मचारी अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत योगदान देता है और राज्य भी उतना ही योगदान देता है। फिर पैसा पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा अनुमोदित कई पेंशन फंडों में से एक में निवेश किया जाता है और रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox