
मानसी शर्मा/- मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ में मची भगदड़ ने लोगों को सन्न कर दिया है। पीड़ित लोग अभी तक सदमे से उबर नहीं पाए है। अपनों को खोने वाले अब भी इंतजार में हैं कि वह जरूर घर लौट आएगा। महाकुंभ में मची भगदड़ में 30 लोगों की मौत हो गई है। जिसके बाद लोग स्तबध है। संगम नगरी प्रयागराज में 27 जनवरी की भयावह मंजर को लोग भूल नहीं पार रहे हैं। सवाल महाकुंभ प्रशासन पर खड़े हो रहे हैं कि आखिर उनकी तैयारी क्या थी? क्या लोगों की भीड़ का आकलन प्रशासन नहीं कर पाया? सवाल ये भी उठ रहा है कि मुर्दाघर में 5 शवों को शिनाख्त करने के लिए रखा गया था, तो 24 तस्वीरें क्यों लगाई गई? मुर्दाघर के बाहर 24 तस्वीरें क्यों? एक सवाल जो गहराता जा रहा है वो ये कि अगर 5 शवों की शिनाख्त होनी थी, तो मुर्दाघर के बाहर 24 तस्वीरें क्यों लगाई गई।
भगदड़ के दिन यानी 29 जनवरी को डीआईजी वैभव कृष्ण कह चुके हैं कि 30 लोगों की मौत हुई है। सिर्फ पांच शवों की शिनाख्त होनी बाकी है। तो फिर पोस्टमार्टम हाउस के बाहर 24 तस्वीरें क्यों लगाई है। अस्पताल प्रशासन या फिर खुद डीआईजी वैभव कृष्ण ये अब तक साफ नहीं किए हैं कि जब तीस में से 25 मृतकों की पहचान हो गई थी तो इस पोस्टमार्टम हाउस के बाहर 24 मृतकों की तस्वीरें क्यों लगी हुई है। क्या छिपाई गई दूसरे भगदड़? बुधवार की देर रात संगम नोज के पास हुई भगदड़ के कुछ देर बाद ही दूसरी भगदड़ का वीडियो सामने आया है। उसे पुलिस प्रशासन ने पहले छिपाया? अब दूसरी भगदड़ का वीडियो सामने आया है। जिनमें दिख रहा है कि रास्ता ठसाठस सैकड़ों लोगों से भरा है। लोग बेसुध होते इन वायरल वीडियो में दिखते है। आखिर यहां क्या हुआ था? चश्मदीद अपनी बात रखते हैं लेकिन, कुंभ मेला क्षेत्र के DIG वैभव कृष्ण कहते हैं कि पुलिस के पास दूसरी भगदड़ की कोई जानकारी नहीं है, जांच कराएंगे।
वीडियो जो चर्चा में आए हैं। उन पर डीआईजी कहते हैं किसी ने पुलिस को रिपोर्ट नहीं किया। अपनों के इंतजार में परिवार कुंभ में मंगलवार-बुधवार रात हुई भगदड़ के बाद अब प्रशासन सतर्क है। महाकुंभ में आने वाली अनुराधा कोसती है कि उस घड़ी को, जब दावा है कि इसी भीड़ में वो अपनी मां और दूसरे लोगों के साथ फंसी थीं। एक बार मां से हाथ छूटा तो 72 घंटे बाद भी दोबारा मां मिल नहीं पाई हैं। बिहार के दरंभगा के आईं अनुराधा अपने परिजन को खोजने वाली में अकेली नहीं हैं। बिहार , बंगाल और यूपी अलग-अलग जिलों के लोग प्रयागराज में अपनों को खोज रहे हैं।





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