बुजुर्गों के साथ सरकार का भद्दा मजाक, सम्मान की बजाये किया अपमान

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बुजुर्गों के साथ सरकार का भद्दा मजाक, सम्मान की बजाये किया अपमान

-जनता रेल मंत्री से पूछ रही सवाल, रेलवे ने बुजुर्गों की रियायत हटा दी, कोई बात नहीं, सांसदों को छूट जारी क्यों है? जबकि उन्हे सैलरी व पेंशन दोनो मिल रही

नई दिल्ली/- बुजुर्गों के सम्मान के लिए केंद्र व राज्य सरकारें कई योजनाऐं चलाकर उन्हे सुविधाऐं मुहैया कराती है। लेकिन देश में पहली बार ऐसा हो रहा है जब कोई सरकार बुजुर्गों के साथ भद्दा मजाक करते हुए सम्मान के बजाऐ उनका अपमान करें। जी हां रेल मंत्रालय ने अपने एक बड़े फैसले में अब से बुजुर्गों को टिकट में मिलने वाली छूट को खत्म कर दिया है। लेकिन अब जनता रेल मंत्री से एक सवाल पूछ रही है कि क्या सरकार ने सांसदों व विधायकों को मिलने वाली छूट को भी बंद किया है या फिर वह जारी है तो क्यों है जबकि उनको सैलरी व पेंशन दोनो मिलते हैं। लोगों का कहना है कि नेता अपनी सुविधाओं को कम करने की बजाये बढ़ा रहे है और जनता टैक्स देकर भी सुविधाओं से वंचित है। आखिर यह अन्याय मोदी जी कब तक देश की जनता के साथ करेंगे।
             कोविड दौर के पहले तक 58 साल से ऊपर की महिला को रेल टिकट में 50 प्रतिशत और 60 साल से ऊपर के पुरुष को 40 प्रतिशत की छूट थी। कोविड के दौरान यह सुविधा बंद कर दी गई और अब हमेशा के लिए बंद। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसके लिए लंबा-चौड़ा हिसाब भी बताया है कि इस रियायत से रेलवे को हर साल कितना नुकसान हुआ। 2021-22 में यह छूट बुजुर्गों को न देने से रेलवे को 3400 करोड़ रु. का फायदा हुआ।
              जनता का कहना है कि ठीक है रेलवे कोई नुकसान सहने के लिए तो चलाई नहीं जाती। इस तरह की सुविधाएं जो केवल परम्परा के चलते आप दे रहे थे, अब नफा-नुकसान के बढ़ते दौर में बंद होना ही चाहिए। आपने बंद कर दिया। ठीक किया। लेकिन सांसदों को रेलवे की सुविधाएं अब तक जारी हैं। क्यों हैं? ये सुविधाएं बंद क्यों नहीं की जा रहीं? इनका तो रेल मंत्री ने कोई हिसाब-किताब भी नहीं बताया!

 हिसाब यहां देख लीजिए। मौजूदा सांसद को अपनी पत्नी या पति के साथ फर्स्ट एसी में मुफ्त यात्रा की सुविधा प्राप्त है। पूर्व सांसद को ऐसी ही सुविधा अपनी पत्नी या पति के साथ सेकंड एसी में और अकेले को फर्स्ट एसी में प्राप्त है। मजाल की बात यह है कि यह सुविधा कोविड के दौर में भी बंद नहीं हुई। ये बात और है कि रेलवे को यह पैसा केंद्र सरकार चुकाती है। तो केंद्र सरकार के पास यह पैसा किसका है? हम-आप जैसे करदाताओं का ही तो है।
              आरटीआई के जरिए मिली जानकारी बताती है कि पिछले पांच साल में सांसदों और पूर्व सांसदों की रेल यात्राओं पर सरकार ने 62 करोड़ रु. खर्च किए हैं। 2017-18 से 2021-22 तक मौजूदा सांसदों की रेल यात्रा के लिए 35.21 करोड़ और पूर्व सांसदों की रेल यात्रा के लिए 26.82 करोड़ रु. का बिल लोकसभा सचिवालय को रेलवे ने भेजा है। कोरोना के दौरान आम लोगों को मिलने वाली छूट खत्म कर दी गई, लेकिन सांसदों, पूर्व सांसदों ने महामारी के साल 2020-21 में भी रेलवे के फ्री पास के जरिए 2.47 करोड़ की यात्रा की।
               सरकार से सिर्फ इतनी सी अपील है कि आम आदमी को रेलवे में कोई छूट न देना हो मत दीजिए, लेकिन इन भरे पेट वाले सांसदों की छूट तो तत्काल बंद करनी ही चाहिए। भारी भरकम वेतन-भत्तों और पेंशन के बावजूद सांसदों, पूर्व सांसदों को इस तरह की छूट से क्या रेलवे या सरकार को कोई नुकसान नहीं होता?

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