बांग्लादेश इन दोनों आया भयानक हिंसा की चपेट में, पूरे देश में लगा कर्फ्यू

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September 18, 2026

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बांग्लादेश इन दोनों आया भयानक हिंसा की चपेट में, पूरे देश में लगा कर्फ्यू

-सरकारी नौकरियों में आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्रों का विरोध मार्च -हिंसक प्रदर्शन में अब तक 100 लोगों की मौत

बांग्लादेश/नई दिल्ली/अनीशा चौहान/ – पड़ोसी देश बांग्लादेश इन दिनों भयंकर हिंसक आंदोलन की आग में झुलस रहा है। सरकारी नौकरियों में आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्रों का विरोध मार्च अब हिंसक प्रदर्शन में तब्दील हो चुका है। प्रदर्शनकारी छात्रों के गुस्से का शिकार वहां की सड़कों, सरकारी इमारतों,बसों पर देखने को मिल रहा है। प्रदर्शनकारी बसों समेत निजी वाहनों को भी आग के हवाले कर रहे हैं। इस हिंसक प्रदर्शन में अब तक 100 लोगों की मौत हो गई है।

हिंसक आंदोलन को देखते हुए प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बांग्लादेश में राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू की घोषणा कर दी गई है। साथ ही देश में सेना की तैनाती का आदेश दिया है। इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। वहीं, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि शुक्रवार को भी प्रदर्शन जारी रखेंगे तथा उन्होंने देशभर की मस्जिदों से आग्रह किया कि  मारे गए लोगों के लिए वहां जनाजे की नमाज अदा की जाए।

क्यों मचा है हंगामा?
बांग्लादेश सरकार लगातार प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील कर रही है। लेकिन हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि स्थानीय प्रशासन उसको कंट्रोल कर पाने में विफल साबित हो रहा है। बांग्लादेश में फैली इस अव्यवस्था की वजह नौकरियों में आरक्षण को बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारी नौकरियों में आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में हर साल करीब 3 हजार सरकारी नौकरियों ही निकलती है। जिसके लिए हर बार एवरेज 4 लाख कैंडिडेट अप्लाई करते हैं। बांग्लादेश में मौजूदा आरक्षण प्रणाली के तहत 56 फीसदी नौकरियों रिजर्व हैं। जिसमें आधे से ज्यादा 30 फीसदी पदों पर पाकिस्तान के खिलाफ 1971 मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए आरक्षित की गई है।

क्या है छात्रों की मांग?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग है कि सरकारी नौकरियों में आधे से ज्यादा पदों पर एक खास समूह को आरक्षण देने का नियम खत्म कर दिया जाए। छात्रों की मांग है कि सरकारी नौकरियां बिना आरक्षण  और मेरिट के आधार पर ही मिलनी चाहिए। छात्रों की दलील है कि आरक्षण सिस्टम की वजह से कम मेरिट वाले लोगों को इसका फायदा मिलता है, और वहीं ज्यादा मेरिट वाले लोग बिना नौकरी के रह रह जाते हैं।

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