फिल्म कश्मीर फाइल का प्रभाव, फिर खुलेंगी कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की फाइले..?

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August 25, 2026

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फिल्म कश्मीर फाइल का प्रभाव, फिर खुलेंगी कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की फाइले..?

-वकील ने राष्ट्रपति कोविंद से की एसआईटी गठित करने की मांग

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को दर्शाने वाली फिल्म ’द कश्मीर फाइल्स’ का प्रभाव अब दिखने लगा है। अब कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को लेकर देश में बहस तेज हो गई है। हालांकि कुछ राजनीतिक पार्टियां व नेता इस फिल्म पर सवाल उठा रहे है लेकिन कश्मीरी पंडितों को इस फिल्म के रिलीज होने व प्रधाननंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान के बाद न्याय पाने की एक उम्मीद जगी है जिसे देखते हुए एक वकील और सामाजिक कार्यकर्ता ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को कश्मीरी पंडितों के नरसंहार से संबंधित सभी मामलों को फिर से खोलने और कश्मीर घाटी में हत्याओं की घटनाओं की फिर से जांच करने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करने का निर्देश देने की मांग के लिए एक पत्र लिखा है। वकील और सामाजिक कार्यकर्ता विनीत जिंदल ने राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में 1989-1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के मामलों की जांच के लिए उन्हें फिर से खोलने और जांच के लिए एक एसआईटी के गठन की मांग की है। जिंदल ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि एसआईटी को अब तक दर्ज मामलों की पूरी तरह से जांच करनी चाहिए और पीड़ितों को एक मंच प्रदान करना चाहिए जो न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तत्कालीन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अपने मामलों की रिपोर्ट करने में असमर्थ थे। वकील ने तर्क दिया कि यदि 33 साल पहले हुए सिख विरोधी दंगों से संबंधित मामलों को फिर से खोला जा सकता है और फिर से जांच की जा सकती है, तो 27 साल पहले हुए कश्मीरी पंडितों के मामलों को भी फिर से खोला जा सकता है और फिर से जांच की जा सकती है।

जिंदल ने पत्र में कहा कि घटनाओं के शिकार लोग शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक आघात की स्थिति में थे और पिछले कई वर्षों से अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे थे और वे अपनी शिकायतों को दर्ज कराने, बयान दर्ज कराने की स्थिति में नहीं थे और इसलिए न्याय के अवसर से वंचित हैं। पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करते हुए जिंदल ने तर्क दिया कि जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है कि न्याय का दायित्व काफी हद तक पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के पास है, जो नरसंहार और नुकसान से बिल्कुल अनभिज्ञ हैं। ऐसे कश्मीरी पंडितों को सरकार और संबंधित अधिकारियों द्वारा एक और मौका दिया जाना चाहिए।

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