पहले सत्र के छठे दिन विपक्षी नेता राहुल गांधी ने भगवान शिव की तस्वीर लेकर केंद्र सरकार पर जमकर साधा निशाना

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January 20, 2026

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पहले सत्र के छठे दिन विपक्षी नेता राहुल गांधी ने भगवान शिव की तस्वीर लेकर केंद्र सरकार पर जमकर साधा निशाना

-तस्वीर के जरिए मैं कुछ बताना चाहता हूं- राहुल गांधी -पीएम मोदी ने अपनी सीट से उठकर राहुल के बयान पर निंदा करते हुए विषय को गंभीर बताया

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- 18वीं लोकसभा के गठन के बाद संसद का पहला सत्र चल रहा है।पहले सत्र के छठे दिन नेता विपक्ष राहुल गांधी भगवान शिव की तस्वीर लेकर के संसद पहुंचे। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा, सत्य, अहिंसा और साहस ही हमारा हथियार है। शिव का त्रिशूल अहिंसा का प्रतीक है। अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने कुरान और गुरु नानक की भी तस्वीर दिखाई। कांग्रेस नेता ने कहा, तस्वीर के जरिए मैं कुछ बताना चाहता हूं।

शिवजी से कभी नहीं डरने की शक्ति मिलती है। शिवजी से हमें सत्य से कभी पीछे नहीं हटने की प्रेरणा मिलती रही है। बाएं हाथ में शिवजी का त्रिशूल अहिंसा का प्रतीक है। जबकि दाहिने हाथ में होता तो यह हिंसा का प्रतीक होता। सत्य, साहस और अहिंसा हमारा सिंबल है। जिसपर स्पीकर ओम बिरला ने उनको टोकते हुए कहा कि नियम के तहत ये उचित नहीं है। वहीं इसपर पीएम मोदी भी अपनी सीट से उठकर उनके इस बयान की निंदा की और कहा कि ये विषय बहुत गंभीर है. हिन्दू समाज को हिंसक समाज कहना ठीक नहीं हैं।

‘सभी ग्रंथों में अहिंसा की बात कही गई’

 कांग्रेस नेता ने कहा, जो लोग अपने को हिंदू कहते है और वो 24 घंटा हिंसा और नफरत फैलाते हैं। आप हिंदू हो ही नहीं।”राहुल गांधी ने अपने संबोधन में गुरु नानक देव और जीसस क्राइस्ट की तस्वीरें भी दिखाईं। कुरान का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा, कुरान में लिखा है- डरना नहीं है। जबकि जीसस का भी कहना है डरो मत, डराओ मत। सभी ग्रंथों में अहिंसा की बात कही गई है। सभी ने अहिंसा की बात की है और सभी ने डर मिटाने की बात की है।

‘हममें से कई लोगों पर व्यक्तिगत हमले हुए’

उन्होंने कहा, भारत के विचार संविधान और संविधान पर हमले का विरोध करने वाले लोगों पर एक व्यवस्थित और पूर्ण पैमाने पर हमला किया गया है। हममें से कई लोगों पर व्यक्तिगत हमले किए गए। कुछ नेता अभी भी जेल में हैं। जिस किसी ने भी सत्ता और धन के केंद्रीकरण, गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों पर आक्रामकता के विचार का विरोध किया, उसे कुचल दिया गया।

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