नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- लोकसभा चुनाव के पहले चरण में कम वोटिंग प्रतिशत ने चुनाव आयोग को चिंता में डाल दिया है। चुनाव आयोग को जो आंकडे़ मिले हैं, उसके हिसाब से 2019 की तुलना में इस बार कुल मतदान में लगभग तीन प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। अब बाकी चरणों के लिए ईसीआई नए तरीके से अपनी रणनीति पर काम करेगा। नवीनतम आंकड़ों की मानें तो अब तक 66 फीसदी मतदान पहले चरण में हुआ है। यह अभी भी 2019 के 69 फीसदी के मुकाबले कम है। वहीं कम मतदान को लेकर राजनीतिक दलों में हड़कंप मच गया है। हालांकि पार्टियां इस मतदान का गणित अपने पक्ष और विपक्ष में जोड़कर उसका आकलन कर रही है। वहीं कम मतदान को लेकर भाजपा अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर हो गई है।

कोशिश तो बहुत हुई मगर…
चुनाव आयोग इस बात को मानता है कि मतदान कम होने का कारण उन्हें बहुत चिंता है। आयोग के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि लोगों में चुनाव को लेकर उत्साह तो था, लेकिन इतना काफी नहीं था कि वे मतदान केंद्र पर जाकर वोट डाल सकें। उन्होंने बताया कि मतदान बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग ने बहुत कोशिशें कीं। स्वीप कार्यक्रम के तहत मतदान बढ़ाने की योजना बनाई गई, मशहूर हस्तियों को चुनाव आयोग का दूत बनाकर लोगों को वोट डालने के लिए प्रेरित किया गया, क्रिकेट मैच के दौरान भी लोगों को वोट डालने के लिए जागरूक किया गया और मतदान केंद्रों को भी बेहतर बनाया गया ताकि वोट डालना आसान हो। लेकिन ऐसा लगता है कि ये कोशिशें काफी नहीं रहीं।

तो इन कारणों से नहीं आए वोटर्स
सूत्रों ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया कि चुनाव आयोग कम मतदान के कारणों का विश्लेषण कर रहा है। चुनाव आयोग के पदाधिकारी ने कहा कि इस मुद्दे पर सप्ताह के अंत में होने वाली बैठकों में चर्चा की गई थी और हम मतदान कार्यान्वयन कार्यक्रम के तहत सोमवार तक और अधिक रणनीतियों के साथ सामने आएंगे। सूत्रों के अनुसार, कम मतदान का संभावित कारण गर्मी हो सकती है क्योंकि इस बार मतदान 2019 की तुलना में आठ दिन बाद शुरू हुआ। कई मतदाताओं द्वारा परिणाम को एक पूर्व निष्कर्ष मानते हुए उदासीनता और त्योहार और शादी के मौसम के साथ टकराव को भी फैक्टर माना जा रहा है।

केवल 3 राज्यों में पहले के मुकाबले अधिक मतदान
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, केवल तीन राज्यों-छत्तीसगढ़, मेघालय और सिक्किम में 2019 की तुलना में अधिक मतदान हुआ। नागालैंड में 57.7 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2019 की तुलना में 25 प्रतिशत से अधिक कम है। मणिपुर में 7.7 प्रतिशत अंक, मध्य प्रदेश में 7 प्रतिशत अंक और राजस्थान और मिजोरम में 6 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज की गई। बिहार में सबसे कम 49.2 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। हालांकि इसने चुनाव आयोग को आश्चर्यचकित नहीं किया क्योंकि सर्वेक्षण में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र को शामिल किया गया था, 2019 में मतदान 53.47 फीसदी था। यूपी में भी इस बार पहले फेज में 66.5 प्रतिशत से घटकर 61.1 प्रतिशत हो गया।


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