नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- सहवाग के बाद टीम इंडिया के पूर्व स्टार ऑलराउंडर इरफान पठान ने संन्यास को लेकर चौंका देने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा कि 2009 तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें टीम से बाहर करने में महत्वपूर्व भूमिका निभाई। पठान ने बताया कि श्रीलंका सीरीज में शानदार प्रदर्शन के बाद 2009 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक भी मैच खेलने का मौका नहीं दिया गया।
लल्लनटॉप से बातचीत के दौरा इरफान पठान ने कहा कि उस वक्त मैंने गैरी कर्स्टन से पूछा था कि आखिर उन्हें क्यों बाहर बैठाया गया। इस पर जबाव देते कर्स्टन ने पठान को दो कारण बताए थे। पठान के मुताबिक,कर्स्टन ने कहा कि चीजें उनके हाथ में नहीं थीं। उन्होंने बताया कि दूसरा कारण ये था कि टीम बैटिंग ऑलराउंडर के साथ जाना चाहती थी। मेरी जगह उनके भाई यूसुफ पठान को दी गई, जबकि इरफान खुद को बॉलिंग ऑलराउंडर मानते थे।
प्लेइंग इलेवन कप्तान की पसंद से ही तय होता है- पठान
इरफान पठान ने कहा, मैंने कोच गैरी से पूछा कि ये किसके हाथ में है, लेकिन उन्होंने मुझे इसके बारे में कुछ नहीं बताया। मुझे पहले ही पता था कि ये किसके हाथ में है। प्लेइंग इलेवन कप्तान की पसंद से ही तय होता है। ये फैसला कप्तान, कोच और मैनेजमेंट का होता है। उस समय धोनी कप्तान थे। मैं इस बात में नहीं पड़ना चाहता कि वो फैसला सही था या गलत, क्योंकि हर कप्तान को टीम को अपने तरीके से चलाने का हक है।
सातवें नंबर पर एक बैटिंग ऑलराउंडर की तलाश में थे- पठान
इरफान पठान ने आगे कहा, ‘गैरी कर्स्टन का दूसरा जवाब ये था कि वे उस समय सातवें नंबर पर एक बैटिंग ऑलराउंडर की तलाश में थे। मेरे भाई यूसुफ बैटिंग ऑलराउंडर थे, जबकि मैं बॉलिंग ऑलराउंडर था। दोनों एक-दूसरे से अलग थे, लेकिन किसी एक की ही टीम में जगह बनती थी। आज यदि आप पूछेंगे कि दो ऑलराउंडरों की जरूरत है, तो लोग खुशी-खुशी ले लेंगे।


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