द्वारका श्री रामलीला: सातवीं रात्रि का भव्य मंचन – शबरी प्रसंग से लेकर लंका दहन तक

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 18, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

द्वारका श्री रामलीला: सातवीं रात्रि का भव्य मंचन – शबरी प्रसंग से लेकर लंका दहन तक

नई दिल्ली/द्वारका/अनीशा चौहान/- द्वारका सेक्टर 10 के डीडीए ग्राउंड में मुख्य संरक्षक श्री राजेश गहलोत द्वारा आयोजित द्वारका श्री रामलीला के सातवीं रात्रि के मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। 9 अक्टूबर 2024, बुधवार की रात को रामलीला के इस आयोजन में शबरी प्रसंग से लेकर हनुमान द्वारा लंका दहन तक की घटनाओं का प्रभावशाली और मार्मिक चित्रण किया गया। मुख्य संरक्षक श्री राजेश गहलोत की उपस्थिति में इस आयोजन को और भी भव्यता प्राप्त हुई, जहाँ उन्होंने रामचरित मानस से जुड़े महत्वपूर्ण उपदेशों को साझा किया, जो दर्शकों के मन में गहराई तक उतरे।

शबरी प्रसंग: भक्ति और प्रेम की शक्ति

सातवीं रात की शुरुआत शबरी प्रसंग से हुई, जहाँ भगवान राम शबरी की निस्वार्थ भक्ति से अभिभूत होते हैं। इस दृश्य ने दर्शकों को सिखाया कि भक्ति में जात-पात और किसी बाहरी आडंबर की कोई जगह नहीं होती, केवल शुद्ध हृदय की भावना ही भगवान तक पहुंचती है। मुख्य संरक्षक श्री राजेश गहलोत ने इस प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कहा, “श्री राम का शबरी के प्रति प्रेम और उसकी भक्ति हमें यह सिखाती है कि भगवान के लिए सभी समान हैं। शुद्ध हृदय से की गई सेवा ही सच्ची भक्ति है।”

हनुमान मिलन: सेवा और समर्पण का प्रतीक

इसके बाद हनुमान मिलन का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जहाँ हनुमान भगवान राम से मिलकर उनके प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण व्यक्त करते हैं। हनुमान जी का चरित्र सेवा और समर्पण का आदर्श उदाहरण है। श्री गहलोत ने इस पर कहा, “हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि सच्ची भक्ति सेवा में है। जब हम अपने जीवन को दूसरों की सेवा और धर्म की स्थापना के लिए समर्पित करते हैं, तब हम वास्तविक आनंद और सफलता प्राप्त करते हैं।”

राम-सुग्रीव मैत्री और बाली वध: धर्म की स्थापना

राम और सुग्रीव की मैत्री का चित्रण भी इस रात के मुख्य आकर्षणों में से एक रहा, जहाँ भगवान राम ने सुग्रीव के खोए हुए राज्य को वापस दिलाने में सहायता की। इसके बाद बाली वध का दृश्य हुआ, जो न्याय और धर्म की स्थापना का प्रतीक है। इस प्रसंग में श्री गहलोत ने कहा, “राम का बाली वध धर्म और न्याय की स्थापना का संकेत देता है। यह हमें यह सिखाता है कि असत्य और अन्याय के खिलाफ खड़े होना ही सच्ची धर्म की राह है।”

रावण-सीता संवाद: नारी शक्ति का सम्मान

इसके बाद रावण और सीता के बीच संवाद दिखाया गया, जहाँ रावण सीता को अपने साथ ले जाने का प्रयास करता है, लेकिन सीता दृढ़ता से उसका विरोध करती हैं। इस प्रसंग ने नारी शक्ति और उसकी मर्यादा का संदेश दिया। श्री गहलोत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “सीता का साहस और उनकी निष्ठा हमें यह सिखाती है कि नारी की शक्ति को कम नहीं आंका जा सकता। हमें समाज में नारी का सम्मान और उसकी गरिमा को बनाए रखना चाहिए।”

हनुमान-सीता संवाद और लंका दहन: हनुमान की वीरता

रामलीला के अंत में हनुमान और सीता का संवाद और लंका दहन का दृश्य दिखाया गया, जहाँ हनुमान जी ने रावण की लंका को जलाकर राम की शक्ति का संदेश दिया। इस प्रसंग ने दर्शकों में उत्साह और जोश भर दिया। श्री गहलोत ने इस पर कहा, “हनुमान जी की वीरता और बुद्धिमानी हमें यह सिखाती है कि जब हम सच्चे मार्ग पर होते हैं, तब हमें किसी भी कठिनाई का सामना करने से डरना नहीं चाहिए। सत्य और धर्म की विजय निश्चित है।”

मुख्य संरक्षक श्री राजेश गहलोत के विशेष उपदेश

रामचरित मानस के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों के माध्यम से श्री राजेश गहलोत ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि श्री राम की लीलाएं हमें जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा, “रामलीला न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन में सत्य, धर्म, और सेवा का पालन कैसे करना चाहिए। भगवान राम का आदर्श जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा है, जिसे हमें अपने जीवन में उतारना चाहिए।”

निष्कर्ष: आस्था, भक्ति और नीतियों का अद्वितीय संगम

द्वारका श्री रामलीला की सातवीं रात्रि का आयोजन दर्शकों के लिए एक भावनात्मक और भव्य अनुभव था। श्री गहलोत के उपदेशों और रामायण के प्रसंगों ने दर्शकों को धर्म और भक्ति की राह पर चलने की प्रेरणा दी। लंका दहन तक के इन सभी प्रसंगों ने रामलीला को एक भव्यता प्रदान की, जो द्वारका श्री रामलीला को देश की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध रामलीलाओं में से एक बनाता है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox