द्वारका कौन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी की मनभावन लीला का आयोजन

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May 5, 2026

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द्वारका कौन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी की मनभावन लीला का आयोजन

—इस्कॉन द्वारका में 2 मई को ‘रुक्मिणी द्वादशी’ उत्सव —लक्ष्मी देवी का ही एक स्वरूप हैं रुक्मिणी मैया —बच्चों के मनोभावों में दिखेंगे आध्यात्मिक रंग

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज़/ द्वारका/ शिव कुमार यादव/- वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी के बाद आने वाली द्वादशी को रुक्मिणी द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इस्कॉन द्वारका दिल्ली श्री श्री रुक्मिणी द्वारिकाधीश मंदिर में 2 मई को ‘रुक्मिणी द्वादशी’ उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर पूरा दिन कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।
               

  प्रातः 8 बजे परम पूजनीय भक्ति आश्रय वैष्णव स्वामी महाराज द्वारा रुक्मिणी द्वादशी के उपलक्ष्य में कथा की जाएगी। जिसमें भक्तों के मन में उठने वाले कई संशयों का निवारण होगा। जैसे कि अकसर भक्तों के मन में यह सवाल आता है कि श्रीकृष्ण की अर्धांगिनी कही जाने वाली श्रीमती रुक्मिणी देवी, क्या श्रीमती राधारानी ही हैं! आचार्य बताते हैं कि स्कंध पुराण में उल्लेख मिलता है कि जो स्थान वृंदावन में श्रीमती राधारानी का है, वही स्थान द्वारिका में माँ रुक्मिणी का है। श्रीमती राधारानी सभी शक्तियों का विस्तार करने वाली आदि शक्ति हैं, क्योंकि वे भगवान की अंतरंगा शक्ति हैं। उन्हीं से लक्ष्मी देवी प्रकट होती हैं और लक्ष्मी देवी का ही एक स्वरूप रुक्मिणी मैया हैं। अतः हम समझ सकते हैं कि श्रीमती राधाजी का ही विस्तार लक्ष्मी जी हैं और लक्ष्मी जी का ही विस्तार रुक्मिणी जी हैं तो तत्व की दृष्टि से राधारानी की ही प्रकटस्वरूपा श्रीमती रुक्मिणी मैया हैं। इस प्रकार लगभग डेढ़-दो घंटे की कथा में भक्तगण भगवान श्रीकृष्ण और माँ रुक्मिणी की लीला का रसास्वादन कर सकेंगे और उनकी कृपा प्राप्त कर सकेंगे।
                कार्यक्रम की इसी श्रृंखला में एक ओर शाम 4 बजे कीर्तन आरंभ होगा तो वही दूसरी ओर इस शुभ अवसर पर तुला दान भी करवाया जाएगा। शाम 5 बजे से बच्चों की कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें वे अपने मनोभावों से आध्यात्मिक रंग बिखेरेंगे। शाम 6 बजे  द्वारिका की गोमती नदी के जल से महा अभिषेक होगा एवं शाम 6.30 बजे गोपाल फन स्कूल (जीएफएस) के बच्चों की नृत्य प्रस्तुति आयोजित की जाएगी। शाम 7 बजे भगवान को भोग अर्पण के बाद महाआरती की जाएगी। तत्पश्चात भक्तों के लिए प्रसाद वितरण किया जाएगा।
                 आप सभी परिवार सहित इस उत्सव में भाग लें और भक्तिमय जीवन को आगे बढ़ाने के लिए माँ रुक्मिणी से आशीर्वाद प्राप्त करें।

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