दिल्ली हाई कोर्ट को ईमेल से बम की धमकी, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

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May 5, 2026

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-सुबह कोर्ट परिसर में मचा हड़कंप

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     शुक्रवार की सुबह दिल्ली हाई कोर्ट को एक धमकी भरा ईमेल मिला, जिसमें अदालत परिसर और जजों के चैंबर में बम लगाए जाने की बात कही गई थी। ईमेल मिलते ही कोर्ट में चल रही सुनवाई को तुरंत रोक दिया गया और न्यायाधीश, वकील एवं पक्षकारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कुछ ही देर में पुलिस, बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। मेटल डिटेक्टर सहित अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से पूरे परिसर—पार्किंग, रिकॉर्ड रूम, कैंटीन और टॉयलेट—की गहन तलाशी ली गई, लेकिन कोई विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई।

मेल में दी गई खतरनाक धमकियाँ
पुलिस सूत्रों के अनुसार धमकी भरे ईमेल में तीन बम लगाए जाने का दावा किया गया था, जिन्हें दोपहर 2 बजे तक विस्फोट करने की बात कही गई थी। इसमें यहां तक लिखा गया कि एक बम इस्लामिक प्रार्थना के बाद फटेगा। धमकी को गंभीर दिखाने के लिए संदेश में अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं का इस्तेमाल किया गया था। ईमेल में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और एक व्यक्ति डॉ. शाह फैसल का भी जिक्र था, साथ ही 1998 के पटना ब्लास्ट जैसी घटना दोहराने का हवाला दिया गया।

दिल्ली पुलिस ने की एफआईआर, जांच जारी
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ईमेल के स्रोत की जांच शुरू कर दी है। नई दिल्ली जिले के डीसीपी देवेश कुमार महला ने बताया कि अब तक की जांच में यह मेल फर्जी पाया गया है और इसका हाल ही में स्कूलों को मिली धमकियों से कोई संबंध नहीं है। पुलिस तकनीकी स्तर पर मेल की ट्रैकिंग कर रही है, ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।

पहले भी मिल चुकी हैं धमकियाँ
यह कोई पहली घटना नहीं है जब अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई हो। फरवरी 2024 में भी हाई कोर्ट को धमकी मिली थी, जो जांच के बाद फर्जी निकली। अप्रैल 2025 में द्वारका जिला अदालत में भी इसी तरह की सूचना दी गई थी। इसके अलावा, मई 2025 में हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और सरकार से ऐसे मामलों में संसाधनों और सुरक्षा इंतजामों की विस्तृत जानकारी मांगी थी।

लगातार बढ़ रहे फर्जी अलर्ट
बीते डेढ़ साल में दिल्ली-एनसीआर के 500 से अधिक प्रतिष्ठानों को बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। हर बार ये अलर्ट फर्जी साबित हुए, लेकिन इनसे लोगों में दहशत फैल जाती है और सुरक्षा एजेंसियों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। ताजा मामला एक बार फिर यही दर्शाता है कि फर्जी धमकियों के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिशें लगातार जारी हैं।

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