दिल्ली साइबर पुलिस ने QR कोड फ्रॉड का किया पर्दाफाश, राजस्थान से आरोपी गिरफ्तार

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July 8, 2026

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-साइबर धोखाधड़ी में मास्टरमाइंड गिरफ्तार, डिजिटल साक्ष्य बरामद

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-      दिल्ली के नॉर्थ जिला साइबर पुलिस स्टेशन ने एक जटिल QR कोड छेड़छाड़ आधारित साइबर फ्रॉड केस का खुलासा किया है। लगातार फील्ड जांच और तकनीकी विश्लेषण के बाद आरोपी मनीष वर्मा (19 वर्ष), निवासी थली, चाकसू, जयपुर, राजस्थान को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के मोबाइल फोन से 100 से अधिक एडिट किए हुए और मूल QR कोड बरामद किए गए। साथ ही, धोखाधड़ी की गई राशि आरोपी के बैंक खाते में ट्रेस कर ली गई।

घटना का सार
एफआईआर के अनुसार, 13 दिसंबर 2025 को शिकायतकर्ता चांदनी चौक स्थित एक प्रतिष्ठित गारमेंट शॉप में ₹2.50 लाख की लेहंगा खरीदने गई थी। भुगतान के लिए उसने QR कोड स्कैन कर दो डिजिटल भुगतान किए — ₹90,000 और ₹50,000, कुल ₹1.40 लाख। बाद में दुकान प्रबंधन ने बताया कि उक्त राशि उनके बैंक खाते में जमा नहीं हुई। धोखा महसूस होने पर शिकायतकर्ता ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई और साइबर नॉर्थ में मामला पंजीकृत हुआ।

जांच और गिरफ्तारी
इंस्पेक्टर रोहित गहलोत के नेतृत्व में विशेष टीम ने 250 से अधिक CCTV फुटेज का विश्लेषण कर आरोपी की पहचान की। आरोपी अक्सर अपनी पहचान बदलता और CCTV कैमरों से अपने ठिकाने को सुरक्षित करता था। तकनीकी और फील्ड सर्विलांस के बाद 12 दिसंबर को मनीष वर्मा को मौजपुर, दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने अपनी संलिप्तता कबूल की और पूरा अपराध मॉडल साझा किया।

अपराध की विधि
जांच में सामने आया कि आरोपी ने मूल QR कोड को एडिट कर अपने बैंक खाते से लिंक कर दिया, जबकि QR कोड का दृश्य रूप असली जैसा ही रखा। फिर इसे दुकानदारों के पास रखा गया, ताकि ग्राहक भुगतान करते समय धोखा खा जाए। आरोपी ने यह तरीका दक्षिण भारतीय फिल्म “वेट्टैयन” से प्रेरणा लेकर अपनाया।

बरामदगी और डिजिटल साक्ष्य
गिरफ्तारी के बाद आरोपी के पास से मोबाइल फोन, 100 से अधिक एडिट किए गए QR कोड, चैट्स, स्क्रीनशॉट और वित्तीय रिकॉर्ड बरामद हुए। इन डिजिटल साक्ष्यों से कई और संभावित पीड़ितों और जुड़े लेन-देन की पहचान संभव हुई।

आरोपी का प्रोफाइल
मनीष वर्मा, 19 वर्ष, 10वीं पास, बेरोजगार, जयपुर का निवासी, QR कोड फ्रॉड का मास्टरमाइंड और अकेला कार्यान्वयनकर्ता है। उसने मोबाइल आधारित इमेज एडिटिंग एप्लिकेशन और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म का स्वयं शिक्षित उपयोग किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने पूरी साजिश और अपराध की प्रक्रिया स्वीकार की।

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