नई दिल्ली/- उपराज्यपाल और आप सरकार में जारी घमासान के बीच वीरवार को सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया। कथित शराब नीति घोटाले के बाद अब सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति भी जांच के दायरे में आ गई है।
उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने दिल्ली सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितताओं और फर्जी शिक्षकों के वेतन भुगतान में धन के गबन के आरोपों की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। उपराज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने वीरवार को यह जानकारी दी।
उपराज्यपाल सचिवालय ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को शिक्षा निदेशालय के निदेशक को निर्देश देने के लिए कहा है कि वह अपने स्कूलों में दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त सभी अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, उपस्थिति और वेतन की निकासी संबंधी जानकारियों को तुरंत सत्यापित करें। इस बाबत स्थिति रिपोर्ट एक माह के भीतर सौंपने को कहा गया है।
उपराज्यपाल सचिवालय ने मुख्य सचिव को भेजे गए नोट में कहा है कि उपराज्यपाल ने पाया है कि फर्जी अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति और धन गबन के मामले गंभीर चिंता के विषय हैं और यह प्रधानाचार्य, उपप्रधानाचार्य व लेखा कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं हो सकता।
उपराज्यपाल सक्सेना ने हाल में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को दिल्ली सरकार के एक स्कूल के चार उप-प्रधानाचार्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने की अनुमति दी थी। इन पर फर्जी अतिथि शिक्षकों के माध्यम से धन घोटाले का आरोप है। बता दें कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में करीब 25,000 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं।
दिल्ली सरकार ने जांच का किया स्वागत
दिल्ली सरकार ने इस मुद्दे पर जारी बयान में कहा है कि हम किसी भी जांच का स्वागत करते हैं। अगर कोई गलत काम करता है, तो उसे सजा मिलनी ही चाहिए।


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