तमन्ना भाटिया के इस बयान से मची फिल्म इंडस्ट्री में खलबली…’साउथ फिल्में है ‘रूटेड’ लेकिन बॉलीवुड की फिल्में…’

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 7, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

तमन्ना भाटिया के इस बयान से मची फिल्म इंडस्ट्री में खलबली…’साउथ फिल्में है ‘रूटेड’ लेकिन बॉलीवुड की फिल्में…’

मानसी शर्मा /-  हिंदी के अलावा तमिल और तेलुगु फिल्मों में काम करने वाली तमन्ना भाटिया एक बार फिर बॉलीवुड पर राज करने में कामयाब रही। श्रद्धा कपूर, राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी स्टारर फिल्म ‘स्त्री 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया है।

वहीं इस फिल्म की सफलता के बाद तमन्ना ने एक पॉडकास्ट में अपने करियर पर बात करते हुए बॉलीवुड और साउथ फिल्मों में अंतर बताते हुए कुछ ऐसा कहा जिससे वह चर्चा का विषय बन चुकी है।

जमीन से जुड़ी हई है साउथ की फिल्में

हाल ही के एक पॉडकास्ट में उन्होंने अपने करियर पर खुलकर बात की। साथ ही अभिनेत्री ने बताया कि उनके अनुसार साउथ की फिल्में ज्यादातर रूटेड होती है यानी जमीन से जुड़ी हई कहानियां। इसलिए ही वे दर्शकों को ऐसी फिल्में ज्यादा पसंद आती हैं।

तमन्ना ने दिया जवाब

पॉडकास्ट के दौरान होस्ट ने जब तमन्ना से पूछा कि बॉलीवुड की फिल्में साउथ की फिल्मों से किस तरह अलग हैं, तब इस पर एक्ट्रेस ने जवाब दिया कि’मैंने जो अंतर देखा है, वह यह है कि साउथ की फिल्में अपने भौगोलिक स्थानों के संदर्भ में ज्यादा बात करती हैं। मुझे लगता है कि उनकी विषय-वस्तु मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर इसलिए अनुवादित हो रही है क्योंकि वे मूल कहानियों को बताने की कोशिश कर रही हैं।’

बुनियादी मानवीय भावनाओं पर बनती है साउथ की फिल्में

एक्ट्रेस आगे कहती है, ‘वे लोगों में से कुछ को चुनने के नजरिए से काम नहीं करते। वे बुनियादी मानवीय भावनाओं, माँ, पिता से जुड़ी, भाई, बहन से बदला लेने वाली कहानियों को चुनते हैं जो अलग-अलग कहानी कहने के फॉर्मेट के जरिए बुनियादी मानवीय भावनाओं के बारे में कई और कहानियां बताती हैं। वे अपने दृष्टिकोण को जिस तरह से पेश करना चाहते हैं, उसे लेकर भी बहुत चिंतित रहते हैं। वे अलग-अलग तरह के लोगों की सेवा करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। वे सिर्फ वही बताने की कोशिश कर रहे हैं जो वे पूरी तरह से जानते हैं। मुझे लगता है कि दक्षिण के लिए यह वाकई कारगर रहा है।’

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox