नई दिल्ली/अनीशा चौहान/- झारखंड में साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं, जिससे प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। इस बीच, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। चंपई सोरेन ने हाल ही में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था, “अभी मुझमें राजनीति बाकी है,” जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
क्या चंपई सोरेन बन सकते हैं अगले बाबूलाल मरांडी?
राजनीतिक विश्लेषक अनुमान लगा रहे हैं कि चंपई सोरेन झारखंड के अगले बाबूलाल मरांडी बन सकते हैं। बाबूलाल मरांडी, जिन्हें 2003 में भाजपा ने मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था, ने बाद में झारखंड विकास मोर्चा (JVM) बनाई थी और फिर 2020 में भाजपा में वापसी की थी। चंपई सोरेन के संदर्भ में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिल सकती है।
चंपई सोरेन की नाराजगी और भाजपा की ओर से डोरे
चंपई सोरेन की नाराजगी का मुख्य कारण यह है कि हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद चंपई को मुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन हेमंत सोरेन की रिहाई के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद चंपई सोरेन ने पार्टी में उच्च पद की मांग की, लेकिन उन्हें कोई महत्वपूर्ण पद नहीं मिला। भाजपा ने अब चंपई सोरेन को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। झारखंड बीजेपी के सह चुनाव प्रभारी हिमंता बिस्वा सरमा और पूर्व अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने चंपई सोरेन की तारीफ की है और जेएमएम में उनके साथ किए गए व्यवहार को गलत बताया है।
चंपई सोरेन की राजनीतिक स्थिति और प्रभाव
चंपई सोरेन झारखंड की राजनीति में एक प्रमुख नेता हैं। वे चार सरकारों में मंत्री और एक बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनका प्रभाव 14 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर है। वे कोल्हान क्षेत्र से आते हैं, जहां उन्हें “कोल्हान का टाइगर” कहा जाता है। इस क्षेत्र में जेएमएम और कांग्रेस का प्रभाव मजबूत है, लेकिन भाजपा चंपई सोरेन के समर्थन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।


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