जम्मू-कश्मीर में परिसीमन ने बदल दिया पूरा परिवेश, अमित शाह ने बताया पूरा सीन

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जम्मू-कश्मीर में परिसीमन ने बदल दिया पूरा परिवेश, अमित शाह ने बताया पूरा सीन

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- गृह मंत्री अमित शाह ने आज जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन बिल 2023 और जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक 2023 पर लोकसभा में बहस का जवाब देते हुए कहा कि नाम से सम्मान जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ये वही लोग देख पाते हैं जो अपने से पीछे से रह गए लोगों की अंगुली पकड़कर उसे संवेदना से आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि वो लोग इसे नहीं समझ सकते हैं जो इसका उपयोग वोट बैंक के लिए करते हैं। शाह ने कहा कि यह बिल 70 वर्षों से जिनपर अन्याय हुआ, अपमानित हुए और जिनकी अनदेखी की गई, उनको न्याय दिलाने का बिल है। साथ ही शाह ने जम्मू-कश्मीर परिसीमन के बाद राज्य में विधानसभा में सीटों का भी ऐलान कर दिया।


          शाह ने बताया कि नए संशोधन को आने वाले दिन में हर कश्मीरी जो प्रताड़ित है वो याद रखेगा, हर कश्मीरी जो पिछड़ा है वो याद रखेगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 70 साल से दर-दर की ठोकरे खाने वाले अपने ही भाई-बहनों को न्याय दिलाने के लिए दो सीटों का रिजर्वेशन दिया। अपना देश छोड़कर यानी पोक छोड़कर यहां शरणार्थी बने लोगों को आरक्षण दिया। उन्होने कमजोर लोगों को पिछड़ा वर्ग वाला संवैधानिक शब्द दिया। नए संशोधन को उन्होने संसद में कश्मीर की सियासत बदलने वाला बिल बताते हुए नेहरू की तरफ इशारा कर कांग्रेस को भी छेड़ा।

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन का आंकड़ा समझिए

कहां कितनी सीटें, जानिए
परिसीमन का जिक्र करते हुए शाह ने बताया कि परिसीमन की जो सिफारिश है उसको कानूनी जामा पहनाकर आज इसे संसद के सामने रखा है। शाह ने बताया कि दो सीटें कश्मीर विस्थापितों के लिए आरक्षित होंगी। एक सीट पोक के विस्थापित व्यक्तियों के लिए दी जाएगी। इसमें से एक महिला होना जरूरी है। 9 सीटें एसटी के लिए आरक्षित की गई है। एससी के लिए भी सीटों का आरक्षण किया गया है। परिसीमन आयोग की सिफारिश के पहले जम्मू में पहले 37 सीटें थीं जिसे अब 43 कर दी गई है। कश्मीर में पहले 46 सीटें थी अब 47 हुई है। पोक की 24 सीटें हमने रिजर्व रखी है। क्योंकि वो हिस्सा हमारा है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पहले 107 सीटें थीं जो अब बढ़कर 114 हो गई हैं। पहले दो नामांकित सदस्य हुआ करते थे अब 5 सदस्य होंगे। कश्मीर के कानून के हिसाब से दो महिलाओं को राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता है। धारा 15 के अनुसार किया जाता है। अब इसमें कश्मीरी प्रवासियों में 2, जिसमें एक महिला और पोक से एक नामांकन किया जाएगा।

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