छत्रपति शिवाजी को नही कुचल सके विदेशी आक्रांता- दत्तात्रेय

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September 9, 2026

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छत्रपति शिवाजी को नही कुचल सके विदेशी आक्रांता- दत्तात्रेय

-लेकिन इतिहासकारों ने कुचल दिया, हमारी संकुचित भावना ने उन्हे हरा दिया

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- आरएसएस के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होस बोले ने कहा कि शिवाजी महाराज को धर्म विरोधी, राष्ट्र विरोधी, विदेशी मुगल आक्रांता नहीं कुचल सके। मुगल आक्रांता उनको नहीं हरा सके। लेकिन इतिहासकारों ने उनको कुचल दिया। हमारी संकुचित भावना ने उनको हरा दिया।

छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में हिंदवी स्वराज स्थापना दिवस महोत्सव का आयोजन किया गया। बुधवार को अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में इस अवसर पर उन्होंने ये विचार व्यक्त किया।
         कार्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और राज्याभिषेक पर एक लघु नाटक तथा लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। छात्रों को सम्मानित भी किया गया, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय की पत्रकारिता की शिक्षा ले रही तमन्ना सहित कई अन्य को उनके कार्य के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम स्थल पर छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवपूर्ण शासन काल तथा दिल्ली में हिंदवी और मराठा साम्राज्य को दर्शाती प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुप्रसिद्ध लेखक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जे साई दीपक ने इसकी अध्यक्षता की। दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि हमारे जो महापुरुष है, वो पूरे देश के लिए महापुरुष हैं। जैसे शिवाजी महाराज ने हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना करके इस देश के धर्म एवं राष्ट्रीयता की रक्षा करी। उसका पुनर्जागरण किया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार किसी भी क्षेत्र के, किसी भी भाषा के महापुरुष जिन्होंने राष्ट्र, धर्म, संस्कृति के लिए कार्य किया, अथवा धार्मिक क्षेत्र में, सांस्कृतिक क्षेत्र में; इसी प्रकार का कार्य किया उनको किसी न किसी रूप से प्रांत एवं भाषा के साथ जोड़कर उनके महानता को संकुचित करने का बहुत ही दोषपूर्ण कार्य हुआ है। इस कारण से महापुरुषों को, विभूति पुरुषों को, राष्ट्र नायकों को हमने छोटे पहचान से इतिहास में रख दिया।
         दत्तात्रेय ने कहा कि शिवाजी भी इस तरह की क्षेत्रीयता का शिकार बने है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज को उस समय के धर्म विरोधी, राष्ट्रीय विरोधी विदेशी आक्रान्ता कुचल नहीं सके, उनको हरा नहीं सके। लेकिन इतिहासकारों ने उनको कुचल दिया। हमारी संकुचित भावना ने उनको हरा दिया। उन्होंने शिवाजी को एक संगठन एक नेतृत्व देने वाले राजर्षि बताया।
         जे साईं दीपक ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ऐसे शासक हुए जिन्होंने हिंदी भी स्वराज की नींव डालकर भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए उत्साहित किया।

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