दिल्ली/सिमरन मोरया/- अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बीजिंग के दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनका राज्य 1,200 किमी लंबी सीमा तिब्बत से साझा करता है, न कि चीन से। उन्होंने 1914 के शिमला समझौते का हवाला देते हुए ऐतिहासिक तथ्यों पर जोर दिया और कहा कि कोई भी भारतीय राज्य सीधे चीन से सीमा साझा नहीं करता।
सीएम खांडू ने चीन की अरुणाचल प्रदेश को “दक्षिण तिब्बत” या “ज़ांगनान” कहने और वहां के स्थानों का नाम बदलने की बार-बार कोशिशों को भ्रामक और ऐतिहासिक रूप से गलत बताया। इसके अलावा, उन्होंने यारलुंग सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी पर चीन के विशाल बांध प्रोजेक्ट को “वाटर बम” करार देते हुए इसे पूर्वोत्तर भारत के लिए एक बड़ा खतरा बताया, क्योंकि चीन ने कोई अंतरराष्ट्रीय जल संधि नहीं की है। खांडू ने यह भी कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन गाडेन फोड्रांग ट्रस्ट और तिब्बती बौद्ध परंपराओं के अनुसार होगा, इसमें चीन का कोई हस्तक्षेप नहीं हो सकता।
राज्य सीधे तौर पर चीन से बॉर्डर शेयर नहीं करता है- सीएम
पीटीआई के साथ एक इंटव्यू के दौरान अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि आप मैप देखिए सच्चाई ये है कि भारत का भी राज्य सीधे तौर पर चीन से बॉर्डर शेयर नहीं करता है, हमारी सीमा सिर्फ तिब्बत से लगी हुई है। यह ठीक है कि 1950 में चीन ने वहां आकर तिब्बत पर जबरदस्ती कब्जा किया, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है, ये बात अलग है, आधिकारिक तौर पर तिब्बत अब चीन के अधीन है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन हम मूल रूप तिब्बत के साथ सीमा साझा करते हैं और अरुणाचल प्रदेश में, हम तीन अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को साझा करते हैं – भूटान के साथ, लगभग 150 किलोमीटर, तिब्बत के साथ, लगभग 1,200 किलोमीटर, जो देश की सबसे लंबी सीमाओं में से एक है, और पूर्वी तरफ, म्यांमार के साथ, लगभग 550 किलोमीटर।


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