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September 8, 2026

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केविके उजवा से शुरू हुई ’’एम.एफ.ओ.आई. किसान भारत यात्रा’’

-पूरे देश में 25 हजार किमी व 4 हजार किसान सभाऐं करेगी किसान भारत यात्रा

नजफगढ़/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- कृषि विज्ञानं केंद्र, उजवा, दिल्ली एवं कृषि जागरण के तत्वाधान में 30 जनवरी को ’’एम.एफ.ओआई. किसान भारत यात्रा’’ की शुरुआत कृषि विज्ञानं केंद्र उजवा के परिसर से की गई। जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में माननीय डॉ. यू. एस. गौत्तम, उप महानिदेशक (कृषि प्रसार), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली एवं विशिष्ट अतिथि के रुप में श्री राजबीर सिंह, सी.ई.ओ. राष्ट्रीय बागवानी अनुसन्धान विकास प्रतिष्ठान, जनकपुरी, नई दिल्ली, श्री एम.सी डोमिनिक, संस्थापक और प्रधान संपादक, कृषि जागरण, श्रीमती शाइनी डोमिनिक, प्रबंध निदेशक, कृषि जागरण और श्री साहुल कंवर, महिंद्रा कंपनी लिमिटेड ने भाग लिया। कार्यक्रम के शुरुआत डॉ डी.के. राणा, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा, दिल्ली ने सभी गणमान्य अतिथियों, वैज्ञानिक गणों एवं किसान भाई बंधुओं का कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हार्दिक स्वागत किया गया एवं कृषि जागरण के सहयोग से आयोजित हो रही इस यात्रा के उद्देश्य के बारे में विस्तृत रूप से प्रतिभागियों को जानकारी दी गई।

श्री एम.सी डोमिनिक नें कृषि जागरण ने ’’एम.एफ.ओ.आई. किसान भारत यात्रा’’ की शुरूआत करने की जानकारी देते हुए कहा कि यह यात्रा देषभर में 25,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा तथा 4000 से अधिक जगहों (जैसे केवीके, ग्राम पंचायत, ग्राम हाट, एपीएमसी, कृषि इनपुट डीलर आउटलेट और कृषि विश्वविद्यालयों) को कवरेज करेगा एवं साथ ही साथ 100 जिला स्तरीय कृषि सम्मेलनों का आयोजन भी करके देशभर के प्रगतिषील किसानों को सम्मानित करके नयी पहचान भी प्रदान करेगा।
            कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय डॉ. गौत्तम जी ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कृषि एवं पशुपालन में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के बारे में बताया एवं कहा कि वर्तमान में जलवायु परिवर्तन से चेरापूंजी में 70 प्रतिशत कम तथा राजस्थान में अधिक वर्षा हुई है। उन्होनें कृषि में कृत्रिम बुद्धि (एआई) और विभिन्न केवीके में अपनाए जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम, परिषद् के विभिन्न संस्थानों में एक्पोजर भ्रमण, कृषि में प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की नवीन तकनीकें, किसान सारथी पोर्टल, किसान उत्पादन संगठन व स्वयं सहायता समूहों के द्वारा व्यापार को सुगम बनाने एवं युवाओं को कृषि की तरफ आकर्षित करने आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी। डॉ. गौत्तम ने कहा कि हमें यदि अच्छी मार्केटिंग और उचित बाजार के साथ निर्यात को मजबूत करना है, तो खाद्यान्न में रासायनिक अवशेषों को कम करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा, उन्होनें कृषि विज्ञान केन्द, दिल्ली को रासायनिक के कम प्रयोग के लिए 2-3 सेमिनार आयोजित करने की भी सलाह दी। उन्होनें युवाओं को कृषि में आने के लिए आग्रह किया एवं कहा कि हम कल्पना कर सकते है कि वर्ष 2047 के समय किसान कैसा होगा, क्यांकि डिजिटलाइजेशन के युग से किसान भी व्यापारी बनेंगे एवं फिर हम साथ मिलकर कहेगें कि किसान का बेटा भी किसान होगा, इसलिए वर्तमान में ही किसान को कंप्यूटर, नई तकनीक और
बाकी सब के बारे में सीखने की आवश्यकता है।
            कार्यक्रम के विषिष्ट अतिथि श्री राजबीर सिंह ने कहा कि देश के प्रत्येक जिले स्तर पर स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र किसानों की आय बढ़ाने एवं युवाओं को कृषि की तरफ आकर्षित एवं स्वरोजगार स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से शामिल हैं। यह केन्द्र समग्र दृष्टिकोण से देश के 80 से 85 प्रतिशत लघु और सीमांत श्रेणी के किसानों की अर्थव्यवस्था के उत्थान पर विशेष जोर दे रहे है जिससे कृषक समुदाय कृषि को व्यवसाय मॉडल के साथ विज्ञान आधारित मांग संचालित दृष्टिकोण, गुणवत्ता वाले बीज एवं लागत में कमी, प्रभावी विपणन, विकासवादी और मिशनरी दृष्टिकोण के साथ आधुनिक तकनीकी की तरफ अग्रसर हो रहे हैं। कृषि जागरण की इस अनुकरणीय पहल में देश के एक लाख से अधिक किसानों को मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहित होगें जिससे सीमांत एवं छोटे किसान सशक्त बन सकेगें और उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा, जिससें हमारे देश के किसान सशक्त होकर प्रौधोगिकियों को अपनाकर कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का कीर्तिमान स्थापित कर सके।
            इस कार्यक्रम के दौरान कृषि जागरण के सहयोग से दिल्ली देहात के 10 किसानों को ’’मिल्यनेर किसान अवार्ड’’ एवं 27 किसानों को ’’प्रगतीशील किसान अवार्ड’’ से सम्मानित किया गया, जो केन्द्र के सहयोग से कृषि, बागवानी एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे है।
            कार्यक्रम के अंत में डॉ. रितु सिंह, विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली ने सभी गणमान्य अतिथियों, वैज्ञानिक गणों एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र की सभी वैज्ञानिकगण एवं अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस कार्यक्रम में 350 से अधिक किसानों एवं महिला किसानों ने भागदारी की।

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