नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/एनसीआर/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 9 महीने से किसान आंदोलन कर रहे है। हालांकि किसान संगठनों व केंद्र सरकार में कई दौर की बात हो चुकी है लेकिन फिर भी कोई समाधान नही निकल पाया है। एक तरफ किसान नेता केंद्र सरकार पर तीन कृषि कानूनों को रद्द करने का दबाव बना रहे है वही दूसरी तरफ केंद्र सरकार मिल बैठकर बात करने की पेशकश कर रही है और फसलों के एमएसपी बढ़ा कर किसानों को खुश करने के संकेत भी दे रही है लेकिन फिर भी किसान नेता आंदोलन से हटने को तैयार नही है जिसे देखते हुए अब किसान आंदोलन लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। हालांकि इस आंदोलन से परेशान लोगों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में याचिका डाली है। जिस पर संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी ने केंद्र सरकार व कई राज्यों को इस मामले में नोटिस भेजा है ताकि किसान आंदोलन खत्म कराया जा सके और लोगों को राहत दी जा सके।
एनएचआरसी के अनुसार, किसान आंदलोन से 9 हजार से अधिक छोटी-बड़ी कंपनियों को नुकसान पहुंचा है और इससे जुड़े लोगों के रोजगार पर भी समस्या आई है। साथ ही इन कंपनियों के अलावा यातायात पर भी प्रभाव पड़ा है, जिससे यात्रियों, मरीजों, शारीरिक रूप से विकलांग लोगों और वरिष्ठ नागरिकों को सड़कों पर होने वाली भारी भीड़ के कारण दिक्कतें उठानी पड़ी है। स्थानीय और वहां से आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को कई शिकायतें मिल चुकी है।
एनएचआरसी ने केंद्र सरकार सहित कई राज्यों जिसमें दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य ऑथोरिटीज भी शामिल है को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी है। आम आदमी पार्टी की अयोध्या से शुरू तिरंगा यात्रा में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने योगी सरकार पर सवाल दागते हुए कहा कि किसानों के आंदोलन के कारण लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है और सीमाओं पर बैरिकेड्स लगा दिए गये है। जिसके कारण पैसा और समय दोनों अधिक लग रहे है। वहीं इन राज्यों के पुलिस प्रशासन को भी इससे संबंधित कार्रवाई पर रिपोर्ट देने को कहा गया है। आपको बता दें कि इसके अलावा किसानों पर आरोप लगाया कि बॉर्डरों पर कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जिस पर गौर करना बेहद जरूरी है।
बहादुरगढ़ बीसीसीआई व पंजाब के उद्यमियों ने सरकार से आंदोलन खुलवाने की गुहार लगाई है। उद्यमियों का कहना है कि किसान आंदोलन की वजह से बंद रास्तों के कारण राज्यों में उद्योग धंधे चौपट हो रहे है। अतः इसमें सरकार हस्तक्षेप कर कोई समाधान निकालें।


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