कश्मीर में बढ़ रहा आंतकियों का दुस्साहस, चार दिन में सेना के 7 जवान हुए शहीद

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 6, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

कश्मीर में बढ़ रहा आंतकियों का दुस्साहस, चार दिन में सेना के 7 जवान हुए शहीद

-अलग-अलग घटनाओं में वीरगति को प्राप्त हुए जवान, सेना को अपने जवानों पर गर्व

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/कश्मीर/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। बीते सोमवार को सेना ने आतंकियों से मुठभेड़ में पांच जवान खो दिए थे। बीती रात एक और हमले में सेना के दो जवान शहीद हो गए। इस तरह चार दिनों में सेना अपने सात जवानों की शहादत दे चुका है। रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने कहा,  “देश के लिए सर्वोच्च बलिदान के लिए राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा।“
                   रक्षा प्रवक्ता देवेंद्र आनंद ने बताया कि गुरुवार शाम पुंछ जिले के मेंढर स्थित वन क्षेत्र में आतंकियों से सेना की मुठभेड़ चल रही थी। इस दौरान सेना की ओर से राइफलमैन विक्रम सिंह नेगी और योगंबर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान दोनों शहीद हो गए। कर्नल आनंद ने कहा, “राइफलमैन विक्रम सिंह नेगी और राइफलमैन योगंबर सिंह ने अनुकरणीय साहस परिचय दिया और कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।“ उन्होंने कहा, “देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा।“ उन्होंने बताया कि राइफलमैन विक्रम सिंह नेगी(26 वर्ष) उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के विमन गांव के रहने वाले थे। वहीं, रायफलमैन योगंबर सिंह (27 वर्ष) उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित संकरी गांव के रहने वाले थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन अभी जारी है। प्रवक्ता ने बताया कि कुछ आतंकी मुठभेड़ के दौरान फरार हो गए थे, जिनकी तलाश की जा रही है।
                    सेना के एक अधिकारी ने कहा, “सोमवार को चमरेर जंगल में आतंकियों के एक ग्रुप ने सेना के एक जेसीओ सहित पांच जवानों को मार था। ऐसी संभावना है कि ये वही आतंकी ग्रुप है, जिससे सेना का ऑपरेशन चल रहा है। बता दें कि सेना ने आतंकवादियों को खत्म करने के लिए सीमावर्ती जिलों राजौरी और पुंछ के बीच स्थित जंगल में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया था। यह इलाका पहाड़ी है और काफी घना है। इसलिए सेना को ऑपरेशन के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
                   सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चार दिनों के भीतर एक जेसीओ सहित सात सैनिकों की मौत निस्संदेह हमारे लिए अपूर्णीय क्षति है। इसके अलावा सीमा पार आतंकवादी शिविर अभी भी बरकरार हैं। जम्मू और कश्मीर में विपक्ष और कश्मीरी पंडितों ने भी इस क्षेत्र में अचानक से आतंकी हमलों और आम लोगों की हत्याओं में अचानक वृद्धि पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि स्थिति 1990 की ओर बढ़ रही है। उन्होंने केंद्र से मामले में हस्तक्षेप करने और तत्काल प्रभावी कदम उठाने का अनुरोध किया है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox