कश्मीर में बढ़ रहा आंतकियों का दुस्साहस, चार दिन में सेना के 7 जवान हुए शहीद

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October 23, 2026

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कश्मीर में बढ़ रहा आंतकियों का दुस्साहस, चार दिन में सेना के 7 जवान हुए शहीद

-अलग-अलग घटनाओं में वीरगति को प्राप्त हुए जवान, सेना को अपने जवानों पर गर्व

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/कश्मीर/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। बीते सोमवार को सेना ने आतंकियों से मुठभेड़ में पांच जवान खो दिए थे। बीती रात एक और हमले में सेना के दो जवान शहीद हो गए। इस तरह चार दिनों में सेना अपने सात जवानों की शहादत दे चुका है। रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने कहा,  “देश के लिए सर्वोच्च बलिदान के लिए राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा।“
                   रक्षा प्रवक्ता देवेंद्र आनंद ने बताया कि गुरुवार शाम पुंछ जिले के मेंढर स्थित वन क्षेत्र में आतंकियों से सेना की मुठभेड़ चल रही थी। इस दौरान सेना की ओर से राइफलमैन विक्रम सिंह नेगी और योगंबर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान दोनों शहीद हो गए। कर्नल आनंद ने कहा, “राइफलमैन विक्रम सिंह नेगी और राइफलमैन योगंबर सिंह ने अनुकरणीय साहस परिचय दिया और कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।“ उन्होंने कहा, “देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा।“ उन्होंने बताया कि राइफलमैन विक्रम सिंह नेगी(26 वर्ष) उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के विमन गांव के रहने वाले थे। वहीं, रायफलमैन योगंबर सिंह (27 वर्ष) उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित संकरी गांव के रहने वाले थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन अभी जारी है। प्रवक्ता ने बताया कि कुछ आतंकी मुठभेड़ के दौरान फरार हो गए थे, जिनकी तलाश की जा रही है।
                    सेना के एक अधिकारी ने कहा, “सोमवार को चमरेर जंगल में आतंकियों के एक ग्रुप ने सेना के एक जेसीओ सहित पांच जवानों को मार था। ऐसी संभावना है कि ये वही आतंकी ग्रुप है, जिससे सेना का ऑपरेशन चल रहा है। बता दें कि सेना ने आतंकवादियों को खत्म करने के लिए सीमावर्ती जिलों राजौरी और पुंछ के बीच स्थित जंगल में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया था। यह इलाका पहाड़ी है और काफी घना है। इसलिए सेना को ऑपरेशन के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
                   सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चार दिनों के भीतर एक जेसीओ सहित सात सैनिकों की मौत निस्संदेह हमारे लिए अपूर्णीय क्षति है। इसके अलावा सीमा पार आतंकवादी शिविर अभी भी बरकरार हैं। जम्मू और कश्मीर में विपक्ष और कश्मीरी पंडितों ने भी इस क्षेत्र में अचानक से आतंकी हमलों और आम लोगों की हत्याओं में अचानक वृद्धि पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि स्थिति 1990 की ओर बढ़ रही है। उन्होंने केंद्र से मामले में हस्तक्षेप करने और तत्काल प्रभावी कदम उठाने का अनुरोध किया है।

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