मेरठ/उमा सक्सेना/- मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में हुई महिला की हत्या और नाबालिग बेटी के अपहरण की सनसनीखेज घटना ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। इस मामले के मुख्य आरोपी पारस सोम को लेकर अब उसकी उम्र को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। आरोपी के परिजनों का दावा है कि पारस नाबालिग है और इस संबंध में आज न्यायालय में उम्र से जुड़े अहम दस्तावेज पेश किए जाएंगे। वहीं दूसरी ओर, पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी की तैयारी में जुटी है।
जेल में आरोपी ने खुद को बताया नाबालिग
11 जनवरी को कोर्ट के आदेश पर पारस सोम को जेल भेजा गया था। जेल में रहते हुए आरोपी ने जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा से मुलाकात कर स्वयं को नाबालिग बताया। इसके बाद जेल प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि यदि आरोपी नाबालिग होने का दावा करता है तो उसे न्यायालय में संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। इसी क्रम में अब परिजनों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आयु प्रमाण पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

शैक्षिक दस्तावेज और आधार कार्ड कोर्ट में होंगे पेश
आरोपी के वकील का कहना है कि पारस सोम के शैक्षिक प्रमाण पत्र और आधार कार्ड में उसकी उम्र 18 वर्ष से कम दर्शाई गई है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आज कोर्ट में यह साबित करने की कोशिश की जाएगी कि आरोपी कानूनन नाबालिग है। यदि अदालत दस्तावेजों को मान्य करती है, तो आगे की कानूनी कार्रवाई किशोर न्याय अधिनियम के तहत होगी।
पुलिस के पास अब तक नहीं पहुंचे प्रमाण
इस पूरे मामले पर विवेचना कर रहे सीओ सरधना आशुतोष कुमार का कहना है कि अभी तक आरोपी पक्ष की ओर से पुलिस को आयु से संबंधित कोई भी प्रमाण पत्र या शपथ पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया है। पुलिस का फोकस फिलहाल मामले की निष्पक्ष जांच और सबूतों को जुटाने पर है।
नाबालिग साबित होने पर बदलेगा कानूनी रास्ता
जेल अधीक्षक ने बताया कि न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन किया जाएगा। यदि आरोपी को नाबालिग घोषित किया जाता है तो उसे बाल सुधार गृह भेजे जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस स्थिति में केस की सुनवाई और धाराओं पर भी असर पड़ सकता है।
गांव कपसाड़ बना पुलिस छावनी
मां सुनीता की हत्या और बेटी रूबी के अपहरण के बाद कपसाड़ गांव पूरी तरह से सुरक्षा घेरे में है। हालांकि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है और पीड़िता रूबी सकुशल घर लौट आई है, फिर भी प्रशासन किसी तरह की चूक नहीं चाहता। रूबी के घर से लेकर गांव की सीमाओं तक भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक जवानों की तैनाती की गई है।
बिना पहचान पत्र गांव में एंट्री नहीं
गांव में बाहरी लोगों की आवाजाही पर सख्त रोक लगा दी गई है। पुलिस ने नाकेबंदी कर स्पष्ट कर दिया है कि पहचान पत्र की गहन जांच के बिना किसी को भी गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। मीडिया कर्मियों और बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
रूबी के घर पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था
सुरक्षा के मद्देनजर रूबी के घर को पूरी तरह सुरक्षित क्षेत्र में तब्दील कर दिया गया है। घर के चारों ओर पांच अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही एक महिला दारोगा को विशेष रूप से पीड़िता के साथ तैनात किया गया है, जो हर समय उसकी सुरक्षा और गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।

राजनीति भी हुई गरम
इस मामले ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी हर दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ी है। पार्टी ने रूबी को पहले ही तीन लाख रुपये की सहायता दी है, वहीं सोनू कश्यप के परिवार को दो लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की गई है।
हत्या का हथियार अब तक नहीं मिला
पुलिस अब तक हत्या में प्रयुक्त फरसे को बरामद नहीं कर सकी है। सीओ सरधना ने बताया कि आरोपी को कस्टडी रिमांड पर लेकर हथियार की बरामदगी और अन्य साक्ष्य जुटाए जाएंगे। फिलहाल इस केस में दर्ज एफआईआर के आधार पर ही जांच आगे बढ़ाई जा रही है और धाराओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
बीते बृहस्पतिवार सुबह कपसाड़ गांव की अनुसूचित जाति की महिला सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ गन्ने की छिलाई के लिए जा रही थीं। इसी दौरान गांव के ही आरोपी पारस सोम ने रूबी का अपहरण कर लिया। मां द्वारा विरोध करने पर आरोपी ने फरसे से हमला कर सुनीता की मौके पर ही हत्या कर दी। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया था। पुलिस ने लगातार दबिश के बाद आरोपी को रुड़की रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया और रूबी को सुरक्षित बरामद कर लिया।
जांच जारी, कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
रूबी का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है और न्यायालय में उसके बयान भी दर्ज किए गए हैं। अब पूरे मामले की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि अदालत आरोपी की उम्र को लेकर क्या फैसला सुनाती है। फिलहाल कपसाड़ कांड को लेकर पूरे जिले की निगाहें कोर्ट की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


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