इन्वेस्टमेंट घोटाले में फंसे 30,000+ लोग, 6 महीने में 1,500 करोड़ का चूना

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इन्वेस्टमेंट घोटाले में फंसे 30,000+ लोग, 6 महीने में 1,500 करोड़ का चूना

मानसी शर्मा/-   डिजिटल युग में निवेश के अवसरों की भरमार है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधियों का जाल भी तेजी से फैल रहा है। गृह मंत्रालय की साइबर विंग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह महीनों में देशभर में निवेश से जुड़े घोटालों के कारण 30,000से ज्यादा लोगों को 1,500करोड़ रुपये से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे साइबर ठग आम नागरिकों को आसानी से फंसाने में सफल हो रहे हैं।
निशाना पर कितने शहर?

रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि घोटालों का सबसे ज्यादा असर बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-NCR जैसे प्रमुख महानगरों पर पड़ा है। बेंगलुरु जैसे आईटी हब में काम करने वाले युवा पेशेवरों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है, जो उच्च रिटर्न के लालच में फंस जाते हैं। जानकारी के अनुसार, हैदराबाद पुलिस ने 850करोड़ के एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया, जिसमें स्टॉक मार्केट प्रेडिक्शन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया था। तो वहीं, दिल्ली-NCR में प्रति व्यक्ति औसतन 8लाख रुपये का नुकसान हुआ, जो अन्य शहरों से कहीं ज्यादा है।

कैसे किए जाते हैं ये घोटाले?

बता दें, साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर आकर्षक विज्ञापनों का सहारा लेते हैं। ये विज्ञापन क्रिप्टोकरेंसी, स्टॉक मार्केट या फर्जी फिनटेक ऐप्स में ‘गारंटीड हाई रिटर्न’ का वादा करते हैं। एक बार जब शिकार फंस जाता है, तो ठग फर्जी ट्रेडिंग डैशबोर्ड दिखाते हैं, जहां शुरुआती छोटे मुनाफे देकर विश्वास जीतते हैं। इसके बाद छोटे रिटर्न के बाद बड़े निवेश की सलाह दी जाती है, फिर ऐप अचानक बंद हो जाता है या खाते हैक कर लिए जाते हैं। जिसके बाद व्हाट्सएप ग्रुप्स या फर्जी कस्टमर केयर के जरिए पीड़ित पर दबाव बनाया जाता है। हाल के एक मामले में, बेंगलुरु पुलिस ने एक गैंग को गिरफ्तार किया, जो अपने ही कर्मचारी को ठगने के बाद पकड़ा गया। इसी तरह, साइबराबाद में दो गिरफ्तारियां हुईं, जिन्होंने 2022से 2025तक 850करोड़ की ठगी की।

यह केवल निवेश घोटालों तक सीमित नहीं है। मंत्रालय की रिपोर्ट की मानें तो साल 2025के पहले पांच महीनों में ही ऑनलाइन स्कैम्स से कुल 7,000करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। निवेश फ्रॉड इसमें प्रमुख हिस्सा रखते हैं, खासकर क्रिप्टो और शेयर बाजार से जुड़े होते हैं। पॉन्जी स्कीम्स और ‘गेट-रिच-क्विक’ योजनाएं सबसे आम हैं, जो गुलगुल निवेशकों को लुभाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन्स की बढ़ती संख्या के साथ ये अपराध और संगठित हो गए हैं। 2024में ही 17.45करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया था, और 2025में यह आंकड़ा दोगुना होने की आशंका है।

बचाव के उपाय

सत्यापन करें:किसी भी निवेश ऐप या स्कीम को सेबी (SEBI) या RBI से रजिस्टर्ड चेक करें।

छोटे निवेश से शुरू:कभी भी ‘गारंटीड रिटर्न’ के लालच में पूरा पैसा न लगाएं।

रिपोर्ट करें:अगर ठगी का शक हो, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930पर कॉल करें या nationalcybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

शिक्षा:NISM (National Institute of Securities Markets) जैसी संस्थाओं के वेबिनार्स से निवेश की बुनियादी समझ बढ़ाएं।

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