-केंद्र सरकार की अनूठी पहल है किसान ड्रोन, ड्रोन से किसानों को होंगे प्रत्याशित लाभ
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/-
किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए उसके कृषि क्षेत्र में बदलाव एक अनिवार्य शर्त होती है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि लगभग प्रत्येक देश की आकांक्षा होती है कि वह उच्च-आय की अवस्था प्राप्त करे और इस लक्ष्य की दिशा में कृषिक विकास का महत्वपूर्ण योगदान होता है। खासकर भारत जैसे देश में जहाँ कम-से-कम 60 फीसदी आबादी अपनी आमदनी के मुख्य स्रोत के रूप में कृषि पर आश्रित है, कृषि क्षेत्र में स्थायित्वपूर्ण विकास निर्णायक भूमिका निभाता है। वर्तमान में, कृषि क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 18 फीसदी अंशदान करता है (जर्मन डेटाबेस कंपनी, स्टैटिस्टा के अनुसार)। और भारत के आर्थिक विकास में इसके लगातार भारी योगदान करने के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक कारण यह है कि यह क्षेत्र प्रौद्योगिकी को लगातार अपनाता रहा है।
भारतीय खेती वक्त के साथ कदमताल नहीं कर पाई, क्योंकि उसे उदारीकरण, भूमंडलीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी से कारगर तरीके से जोड़ा नहीं गया। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार कृषि उत्पादन से लेकर बिक्री तक में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है, ताकि खेती-किसानी फायदे का सौदा बन सके। इस दिशा में किसान रेल और किसान उड़ान के बाद सरकार की अनूठी पहल है किसान ड्रोन।
आज कृषि सहित लगभग प्रत्येक उद्योग में इसका सबसे बड़ा संरक्षक है प्रौद्योगिकी। कृषि मूल्यों और प्रौद्योगिकीय नवाचारों के लाभदायक मिश्रण से अधिक हरे-भरे, उत्पादक और संवहनीय भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस प्रकार का एक प्रौद्योगिक आविष्कार है ड्रोन टेक्नोलॉजी। ड्रोन को आधिकारिक रूप से मानवरहित हवाई वाहन यानी अन्मैंड एरियल व्हीकल्स (यूएवी) और मानवरहित विमान प्रणाली (अन्मैंमैंड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स) कहा जाता है। ड्रोन फसल के उत्पादन, फसल के आंकलन, जोखिम प्रबंधन, आपदा के के पूर्वानुमान के सम्बन्ध में पूर्वचेतावनी प्रणालियों की स्थापना, और वनों, मत्स्य व्यवसाय, और वन्यजीवन के संरक्षण को मजबूत करने में सहायक हैं।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष जनवरी में भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा था कि किसी भी राज्य से भूख से मृत्यु की सूचना नहीं है। हालांकि, निष्पक्ष संगठनों ने खुलासा किया है कि भारत की जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को तीन वक्त का भोजन नहीं मिल पाता है। उनलोगों ने जोर देकर कहा है कि सबसे बड़ी अल्प-पोषित आबादी भारत में रहती है। प्रश्न यह है कि हम एक राष्ट्र के रूप में भूख और कुपोषण के खात्मा के साथ-साथ आर्थिक वृद्धि कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं? इसका उत्तर सरल और सीधा है, कि कृषितकनीक पहलों (ऐग्रीटेक इनिशिएटिव्स) को स्वीकार और संरक्षित किया जाए।
इस पृष्ठभूमि में यहाँ उन कुछ तरीकों की चर्चा की गई है जिससे ड्रोन प्रौद्योगिकी पैदावार के पूर्वानुमानों, फसल की निगरानी/ आंकलन, फसल से सम्बंधित जोखिमों में कमी, आप्दासों की भविष्यवाणी और लागतों के इष्टतमीकरण के द्वारा कृषिक उपज की वृद्धि में सहायता कर रही है।
पैदावार के मूल्यांकन के लिए ड्रोन का प्रयोग :
मल्टीस्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल उपकरणों वाले ड्रोन पैदावार के विश्लेषण की उच्चतर सटीकता में मदद करते हैं। प्रभावकारी और कार्यकुशल पैदावार विश्लेषण करने से किसानों और अन्य हितधारकों को फसल और कृषक आय/ हानि के निर्धारण के लिए अतिआवश्यक अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। किसानों के साथ सीधा सरोकार रखने वाले सरकारी और निजी संस्थान पैदावार के सटीक पूर्वानुमान से किसानों को व्यापक फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और अंततः किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। आधुनिक ड्रोनों का लाभ उठाकर फसल के स्वरुप और स्वास्थ्य के बारे में वास्तविक समय में जानकारी पाई जा सकती है।
सैटेलाइट बनाम ड्रोन :
आकाश में बादल भरे होने पर सैटेलाइट (उपग्रह) से की गई निगरानी से अपेक्षित विवरण नहीं मिल पाते हैं। यूएवी से प्राप्त डेटा में ज्यादा बेहतर स्पष्टता, सूचना के कंटेंट और कुशलता होती है। पैदावार का अनुमान और फसल के नुकसान का आंकलन का कार्य पूरा करने के लिए कारगर दृष्टिकोण दोनों दूरस्थ संवेदन पद्धति (रिमोट सेंसिंग मेथड्स) – स्पेस इमेजिंग और यूएवी-आधारित प्रौद्योगिकियों – के एकीकृत प्रयोग पर निर्भर करता है। पहाड़ी इलाकों में पर्वतीय क्षेत्र इमेज (चित्र) पर छाया उत्पन्न करता है जो दिन के समय पर निर्भर करता है, जिस समय फोटो लिया गया था (चित्र 6)। टेरेस फार्मिंग (सीढ़ीनुमा खेती) के अंतर्गत अनेक खेतों की चौड़ाई सैटेलाइट के चित्र पर एक एकल पिक्सेल के आकार से भी छोटी होती है। ऐसे मामलों में सन्दर्भ पैटर्न में यूएवी इमेज और न्यूट्रल नेटवर्क मॉडल के प्रयोग से अपेक्षित मानदंडों की सटीकता सुनिश्चित होती हैं।
फसल के स्वास्थ्य और दबाव विश्लेषण में ड्रोन की सहायता :
वर्ष 2018 में हानिकारक कीटों के एक हमले में महाराष्ट्र के 41 लाख से अधिक किसानों की आशाओं पर पानी फिर गया। इस तबाही से उच्च-तकनीक ड्रोन के सहायता से बचा जा सकता था। ड्रोन का लाभ उठाकर, जिनमें बहुक्षेत्रीय कैमरा सेन्सर्स लगे होते हैं, कृषक पहले ही से दबाव और फसल-संबंधी रोगों की पहचान कर सकते हैं। उन्नत सेंसरों से पुनः प्राप्त किये गए (रिट्रीव्ड) और ऑर्थोमोज़ेइक के रूप में निरूपित डेटा किसानों को फसल की पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ फसल की क्षति कम करने के लिए नए विकल्पों को समझने और जानने में मदद करते हैं। इसी प्रकार, जियो-टैगिंग एरियल इमेज (भूबद्ध हवाई चित्र) महत्वपूर्ण सूचना प्रदान करते हैं जिनसे लागत में कमी आती है और काफी अनुपात में पैदावार बढ़ जाती है। इस उद्देश्य के लिए समय से पहले संभावित क्षति का आंकलन करने के लिए स्थान-विशिष्ट रिपोर्ट निकाली जा सकती है।
फसल के स्वास्थ्य और फसल के संक्रमण का शीघ्र संसूचन सरकार और किसान, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। जहां सरकार किसानों के लिए पर्याप्त क्षतिपूर्ति योजनाओं का निर्धारण कर सकती है, वहीं किसान अग्रिम रूप से अपने भविष्य की योजना बना सकते हैं।
ड्रोन से संसाधन दक्षता के सुधार में मदद मिलती है :
मशीन लर्निंग टूल्स के साथ हवाई चित्रों (एरियल इमेजरी) के संयोजन से किसानों को निर्दिष्ट खेत के क्षेत्र का सटीक अनुमान प्राप्त हो सकता है। अधिकतर किसानों के पास संसाधन सीमित होते हैं, जिसे सही ड्रोन सहयाता से खेतों के अलग-अलग हिस्सों में अपेक्षित मात्रा में परिनियोजित किया जा सकता है। खासकर, थर्मल सेंसरों और रिमोट सेंसिंग टूल्स वाले ड्रोन आसानी और तेजी से पता लगा सकते हैं कि किस क्षेत्र में अतिरिक्त पानी या उर्वरकों की ज़रूरत है। आरजीबी इमेजरी से प्राप्त खेतों की भौगोलिक स्थिति किसानों को जलनिकासी को अधिकतम करने, प्राकृतिक भूमि रनऑफ का अनुसरण करने और जलजमाव से बचने के लिए फसल के स्थापन और पृथक्करण में मदद करती हैं।
ड्रोन किसानों को विषैले रसायनों से बचाते हैं :
कीटनाशक छिड़काव उपकरण से लैस यूएवी या ड्रोन हाथ से छिड़काव करने की तुलना में काफी ज्यादा दक्षतापूर्वक काम करते हैं। कीटनाशकों का हाथ से छिड़काव करना रसायनों के संपर्क में आने वाले लोगों के लिए भी विषैला है और ड्रोन कीटनाशकों के छिड़काव के बदले मानव श्रम को खेती के आवश्यक क्षेत्रों की ओर निर्देशित करके उन्हें विषैले प्रभाव से बचाता है। ड्रोन से कीटनाशक का छिड़काव करना अपेक्षाकृत अधिक समय एवं लागत क्षम होता है।
भविष्य की संभावनायें
कुछ अग्रणी कृषितकनीक (ऐग्रीटेक) प्लैटफॉर्म सटीक डेटा प्राप्त करने के लिए उच्च-तकनीक सेंसरों के साथ एकीकृत अत्याधुनिक हवाई सर्वेक्षण ड्रोनों का प्रयोग कर रहे हैं। इनमें आरजीबी, मल्टीस्पेक्ट्रल, और थर्मल ड्रोन शामिल हैं। इस सूचना का प्रयोग किसानों को और अंततः राष्ट्र को मदद करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दुःख की बात है कि वर्ष 2020 में देश में सूचित आत्महत्या के कुल मामलों में से 7 फीसदी कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों से सम्बंधित थे (एनसीआरबी की रिपोर्ट)। ऐसा मुख्यतः इसलिए है कि आज भी अनेक किसान और अन्य कृषि-हितधारक ड्रोन सहायता जैसी भविष्य-उन्मुखी टेक्नोलॉजी के फायदों से अनजान हैं। वे अभी भी कुछ आपदाओं से असहाय और अंततः खराब फसल या अपेक्षा से कम पैदावार के शिकार हो जाते हैं। यह उचित समय है जब हमें उपलब्ध प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना और धरती से भूख एवं कुपोषण को समाप्त करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र की आर्थिक पैदावार में सुधार का काम आरम्भ कर देना चाहिए। – अखिलेश जैन, सह-संस्थापक, एग्रोटेक इंडिया।


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