बहादुरगढ़/- हस्तशिल्प एवं सांस्कृतिक उत्सव लगातार लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कलाकार, नृत्यकार, संगीतकार गांव से लेकर शहर तक सभी हस्तशिल्प मेले में सांस्कृतिक उत्सव को देखने के लिए चले आए। लोगों का जोश का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्किंग भर चुकी थी, रोड पर लंबी-लंबी कतारें गाडिय़ों की नजर आने लगी शाम होते-होते लोग रंगारंग कार्यक्रम में शिरकत करने लगे सांस्कृतिक उत्सव के दौरान छोटे-छोटे बच्चों ने महिलाओं ने और विद्यार्थियों ने जमकर मंच पर अपने मनपसंद संगीत के साथ नृत्य किया। बच्चों के नृत्य को जनता के द्वारा खूब प्रशंसा मिली। वहीं पर येलो हार्ट मस्टर्ड ऑयल की तरफ से महिलाओं को गिफ्ट पैक दिए गए। बच्चों को नृत्य पर चॉकलेट और उनकी भूरी भूरी प्रशंसा की गई। प्रत्येक दिन सांस्कृतिक उत्सव में कार्यक्रम की शोभा हमारे नृत्य कार, संगीत और परंपरागत शैली से जुड़े लोग बढ़ा रहे हैं।
बहादुरगढ़ क्षेत्र के लिए गौरव की बात है कि उसके क्षेत्र में अन्य राज्यों से सीमावर्ती राज्यों से भी लोग के सांस्कृतिक उत्सव में बढ़-चढक़र भाग ले रहे हैं। हस्तशिल्प मेले में उत्तर प्रदेश के कारपेट, जम्मू कश्मीर का कपड़ा, राजस्थानी रजाई सांगानेर का ब्लॉक प्रिंट, मुरादाबाद का पीतल वर्क, दिल्ली की ऑयल पेंटिंग राजस्थान जूती, टेराकोटा, ब्लू पॉटरी, ज्वेलरी, बेस्ट तारों से बनी हुई पेंटिंग, फुलकारी पंजाब की, उड़ीसा की पट चित्रकारी, बंगाल का कपड़ा व चटाई, हरियाणा दिल्ली राजस्थान का लकड़ी से बना सामान, विद्यार्थियों एवं क्राफ्ट शिक्षकों द्वारा सिखाई व बनाई गई बच्चों की विभिन्न कलाएं। नाबार्ड के द्वारा महिलाओं को दिया गया सहयोग जिसमें ग्रामीण क्षेत्र से विभिन्न स्वयं सहायता समूह के द्वारा भिन्न भिन्न प्रकार की उत्पादों को इस सांस्कृतिक उत्सव में दर्शाया गया है, जिसको आगंतुक बड़े चाव से खरीद रहे हैं।
यह 10 दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव 16 अक्टूबर को रंगारंग कार्यक्रम के साथ समाप्त हो जाएगा। हस्तशिल्प एवं सांस्कृतिक उत्सव के समापन से पहले सभी बड़े नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों व शिल्पकला से जुड़े हुए सभी कला प्रेमियों ने इस बात के लिए जनता से आग्रह किया है कि वह इस कार्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा भाग लें। यह सौभाग्य की बात है कि हरियाणा प्रदेश के बहादुरगढ़ में एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का यह सांस्कृतिक उत्सव हो रहा है। भविष्य में इस को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए शुभकामनाएं भी दी जा रही है। सांस्कृतिक उत्सव में संगीत से जुड़े हुए लोगों का भी ख्याल रखा गया है। गजल, कव्वाली, कवि सम्मेलन और वेस्टर्न संगीत को भी अलग-अलग दिन सांस्कृतिक उत्सव के मंच पर प्रस्तुति के लिए लाया जाएगा।


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