‘अर्धसैनिक झंडा दिवस कोष’ स्थापित करने की मांग तेज

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728  
February 11, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने कर्तव्य भवन में सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    अर्धसैनिक बलों के जवानों के कल्याण, पुनर्वास, पेंशन सुरक्षा और शहीद सैनिकों के परिवारों को आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने के लिए सेना झंडा दिवस कोष की तर्ज पर ‘अर्धसैनिक झंडा दिवस कोष’ बनाए जाने की मांग लगातार उठ रही है। इसी क्रम में अलॉइंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने कर्तव्य भवन में डॉ. सुदिप्ता घोष, डायरेक्टर (पुलिस-2) से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

पहली बार एसोसिएशन प्रतिनिधिमंडल की कर्तव्य भवन में ऐतिहासिक एंट्री
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने बताया कि पूर्व एडीजी एच.आर. सिंह के नेतृत्व में यह पहली बार हुआ कि संगठन का प्रतिनिधिमंडल कर्तव्य भवन में प्रवेश कर उच्च अधिकारियों से सीधे मिला। उन्होंने कहा कि अर्धसैनिक बल देश की आंतरिक सुरक्षा— सीमा प्रबंधन, नक्सल विरोधी अभियान, चुनावों में निष्पक्ष भूमिका, कानून-व्यवस्था नियंत्रण— जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बिना थके, बिना रुके हर परिस्थिति में अपना सर्वोच्च योगदान दे रहे हैं।

“सराहना तो मिलती है, लेकिन समाधान नहीं”
एसोसिएशन ने कहा कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, गृह राज्य मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारी स्थापना दिवस समारोहों में अर्धसैनिक बलों की तारीफ अवश्य करते हैं, लेकिन

पेंशन बहाली,

अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड,

ऑर्गेनाइज्ड सर्विस स्टेटस,

और सबसे महत्वपूर्ण अर्धसैनिक झंडा दिवस कोष की स्थापना जैसे मुद्दे अब भी उपेक्षित हैं।

सेना को उपलब्ध सुविधाएँ, अर्धसैनिक बलों को क्यों नहीं?
महासचिव रणबीर सिंह ने बताया कि हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा सेना झंडा दिवस कोष से रिटायर्ड सैनिकों और गैर-पेंशनभोगियों को 257 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई।
लेकिन दूसरी तरफ,
नक्सल ऑपरेशन में घायल हुए, अंगभंग हुए और लगातार शहीद होते अर्धसैनिक बलों के लिए ऐसा कोई विशेष कोष मौजूद नहीं है।

“जब संकट आता है तो सबसे पहले अर्धसैनिक बलों को भेजा जाता है, लेकिन उनके कल्याण के लिए कोई स्थायी कोष क्यों नहीं?” — एसोसिएशन का सवाल।

सीपीसी कैंटीन न होने वाले क्षेत्रों में मिनी कैंटीन की मांग
पूर्व एडीजी एच.आर. सिंह ने मुलाकात के दौरान उन क्षेत्रों में मिनी कैंटीन खोलने की भी मांग रखी, जहां सीपीसी कैंटीन उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इन महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान के लिए किसी बड़े बजट की नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox