अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों का तेल व्यापार पर असर नहीं पड़ेगा

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February 11, 2026

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अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों का तेल व्यापार पर असर नहीं पड़ेगा

-रूस-भारत संबंध मजबूत, निर्यात बढ़ाने पर फोकस

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया है कि मॉस्को अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ के बावजूद भारत के साथ अपने तेल और व्यापारिक संबंधों को स्थिर बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि तेल व्यापार की मात्रा में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बाहरी दबाव से सुरक्षित रखा जाएगा। पेस्कोव के इस बयान ने यह संकेत दिया कि रूस भारत को निर्यात के लिए प्राथमिकता दे रहा है और किसी तीसरे पक्ष के दबाव में संबंधों को प्रभावित नहीं होने देगा।

तेल की आपूर्ति जारी रहेगी
पिछले दो वर्षों में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों ने रूस की अर्थव्यवस्था को अलग-थलग करने के लिए ‘प्राइस कैप’ और टैंकरों पर प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन पेस्कोव ने आश्वस्त किया कि रूस वैकल्पिक भुगतान तंत्र और ‘शैडो फ्लीट’ के जरिए तेल की आपूर्ति लगातार बनाए रखेगा। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण भरोसा है।

व्यापार घाटे की समस्या पर रूस गंभीर
भारत-रूस व्यापार में असंतुलन की चिंता भी उठ रही थी, क्योंकि भारत अधिकतर तेल और हथियार खरीद रहा है, जबकि रूसी आयात कम हैं। पेस्कोव ने कहा कि रूस भारतीय व्यापार घाटे को लेकर गंभीर है और भारत से आयात बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसका सीधा असर यह होगा कि रूस भारतीय मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पादों और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए अपने बाजार को और खोल सकता है।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बल
पेस्कोव ने यह भी बताया कि मॉस्को और नई दिल्ली मिलकर भारत के निर्यात को बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं। यह कदम न केवल द्विपक्षीय व्यापार संतुलन को सुधारेगा, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को रूस के रूप में एक बड़ा और स्थायी बाजार उपलब्ध कराएगा।

सुरक्षा कवच की आवश्यकता
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि दोनों देशों को अपने व्यापार को बाहरी दबाव और किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने के लिए ‘सुरक्षा कवच’ तैयार करना होगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह संकेत सीधे तौर पर SWIFT से अलग, स्वतंत्र भुगतान प्रणाली जैसे रुपये-रूबल व्यापार या डिजिटल करेंसी के प्रयोग को बढ़ावा देगा।

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