
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शासकों ने इस्राइल से घनिष्ठा बढ़ाने के लिए एक और कदम बढ़ाया है। यूएई शासकों ने शनिवार को आदेश जारी कर इस्राइल के बहिष्कार को औपचारिक रूप से खत्म करने की घोषणा कर दी। यूएई की इस घोषणा से दशकों से वैम्नस्य की खाई में पड़े यूएई-इस्राइल संबंध अब नये आयाम पर है और यूएई-इस्राइल व्यापार युग की शुरूआत हो गई है। अमेरिका के कराए इस शांति समझौता के तहत इस्राइल पश्चिमी तट के विलय की विवादित योजना पर विराम लगाएगा। वहीं हीरा, दवा और तकनीकी क्षेत्र में दोनों देशों में व्यापार भी शुरू होगा। इजराइल और यूएई के बीच संबंधों की शुरुआत की घोषणा 13 अगस्त को की गई थी।
यूएई की सरकारी न्यूज एजेंसी डब्ल्यूएएम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल के बहिष्कार समाप्त करने की घोषणा अबुधाबी के शासक और अमीरात के नेता शेख खलीफा बिन जायद अल नाहन ने की। नए आदेश में इस्राइल और इस्राइल की कंपनियों को यूएई के सातों शेख राज्यों में व्यवसाय की इजाजत दी गई है। नए समझौते ने यूएई में इस्राइली सामानों की बिक्री की भी अनुमति दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले से ही इस्राइली कंपनियों ने अमीरात की कंपनियों के साथ कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर कर लिए हैं। वहीं भविष्य में बैंकिंग, वित्त और विमानन क्षेत्र में संयुक्त उपक्रम के लिए भी कानून बनाए जाएंगे। बता दें कि मिस्र और जॉर्डन के बाद यूएई तीसरा देश है जिसने इस्राइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं।
यूएई पहुंचेगा पहला इस्राइली विमान
समझौते के तहत विमानों की आवाजाही शुरू होगी। सोमवार को इस्राइल की पहली व्यवसायिक उड़ान सुबह 10 बजे अबू धाबी पहुंचेगी, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर समेत अमेरिकी और इस्राइली अधिकारी यात्रा करेंगे। साथ ही इसमें इस्राइल और अमेरिका के आर्थिक और सैन्य मामलों से जुड़े अधिकारी भी शामिल होंगे। शांति समझौते से यूएई को अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-35 मिलने का रास्ता साफ हो गया है। अब तक इस्राइल यूएई को एफ-35 बेचने के खिलाफ था। यूएई को बिना रुकावट अमेरिका से अब कई और हथियार भी मिल सकेंगे।
दोनों ही देशों के बीच हुए शांति समझौते से यूएई की किताबों से 1972 का कानून औपचारिक रूप से खत्म हो जाएंगे। दरअसल, इस कानून के तरह अरब देशों द्वारा व्यापक रूप से रखे गए रुख को प्रतिबिंबित किया गया था कि जिसमें कहा गया था कि इस्राइल को मान्यता तब ही दी जाएगी, जब फिलिस्तीनियों का अपना स्वतंत्र राज्य था। फिलिस्तीनी समूहों द्वारा घोषणा किए जाने के बाद यूएई-इस्राइल समझौते की आलोचना की गई। इन समूहों ने कहा कि यह फिलिस्तीनी मुद्दों को लेकर नहीं किया गया है, इसमें फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों की अनदेखी की गई है।





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