पाकिस्तान पर ब्लैक लिस्ट होने का खतरा बढ़ा, मुश्किल में इमरान सरकार

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पाकिस्तान पर ब्लैक लिस्ट होने का खतरा बढ़ा, मुश्किल में इमरान सरकार

-पाकिस्तान के एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने की उम्मीद ना के बराबर

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/इस्लामाबाद/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- सोमवार से पेरिस में शुरू होने वाली वर्चुअल मीटिंग में पाकिस्तान समेत कई देशों को ग्रे लिस्ट से बाहर करने या उन्हें ब्लैक लिस्ट करने पर फैसला हो सकता है। हालांकि पाकिस्तान के फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने की उम्मीद ना के बराबर ही दिखाई दे रही है और अगर पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट हो जाता हे तो इमरान सरकार की देश-विदेश में मुश्किले बढ़ सकती है। विशेषज्ञो का मत है कि इसकी प्रमुख वजह कुछ यूरोपीय देशों का मानना है कि इमरान सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ सभी कायदें कानूनों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया है।
पाकिस्तान के अखबार डॉन की वेवसाइट के मुताबिक एफएटीएफ का सत्र 22 से 25 फरवरी तक पेरिस में चलेगा, जिसमें पाकिस्तान सहित ग्रे लिस्ट के विभिन्न देशों के मामलों पर चर्चा होगी और अंत में इस पर फैसला किया जाएगा। पिछले साल अक्टूबर में आयोजित मीटिंग में पाकिस्तान को फरवरी 2021 तक ग्रे लिस्ट में ही रखने का फैसला किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक एफएटीएफ के पास इस बात की जानकारी है कि पाकिस्तान सरकार ने अब तक जेयूडी और जैश के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की है। ये दोनों ही संगठन पाकिस्तान की जमीन से बेखौफ काम कर रहे हैं। अमेरिका ने भी पिछले दिनों कहा था कि पाकिस्तान को आतंकी संगठनों को पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल होने से रोकना होगा। अमेरिका के लिए अफगानिस्तान में दिक्कतें पाकिस्तान की वजह से ही बढ़ रही हैं।
फिलहाल पाकिस्तान तीन साल से ग्रे लिस्ट में है। जून 2018 में उसे इस लिस्ट में रखा गया था। एफएटीएफ ने उसे 23 पॉइंट का एक प्रोग्राम भी सौंपा था। संगठन ने कहा था कि न सिर्फ इन शर्तों को पूरा करना है बल्कि इनके पूरा होने के पुख्ता सबूत भी देने होंगे। इसके लिए पाकिस्तान को दिसंबर 2019 तक का समय दिया गया था। बाद में कोरोना की वजह से इस डेडलाइन को बढ़ा दिया गया था। एफएटीएफ के प्रेसिडेंट मार्कस प्लीयर ने पिछले साल अक्टूबर की रिव्यू मीटिंग में कहा था- पाकिस्तान की कार्रवाई में बेहद गंभीर खामियां सामने आई हैं। हम उसे एक मौका और दे रहे हैं। इस बारे में फरवरी में विचार किया जाएगा। हम चाहते हैं कि कार्रवाई से पहले वहां की सरकार को एक मौका और दिया जाए। इसके बाद तय किया जाएगा कि क्या एक्शन लिया जाए। हम हमेशा राहत नहीं दे सकते। रिपोर्ट के मुताबिक थ्।ज्थ् के पास कुछ इंटेलिजेंस वीडियो फुटेज मौजूद हैं, इनसे पता लगता है कि जमात और जैश के आतंकी सरगना अब भी पाकिस्तान में खुलेआम काम कर रहे हैं। एक वीडियो अक्टूबर 2020 का है।
अगर पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में ही रहता या ब्लैक लिस्ट होता है तो दोनों हालात में इमरान खान मुश्किल में आ जाएंगे। खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को उनकी सरकार ठीक नहीं कर पाएगी और दुनिया का कोई भी संगठन उन्हें आर्थिक मदद नहीं दे सकेगा। घरेलू मोर्चे पर विपक्ष को उन्हें घेरने का एक मौका और मिल जाएगा। इमरान पहले से ही काफी दबाव में हैं और विपक्ष का आरोप है कि सिर्फ सेना की मदद की वजह से वे सरकार चला रहे हैं।

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