किसान आंदोलन को लेकर पंजाब और हरियाणा में सियासत हुई तेज

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किसान आंदोलन को लेकर पंजाब और हरियाणा में सियासत हुई तेज

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा और पंजाब आमने-सामने आ गए हैं। पंजाब के सीएम कैप्‍टन अमरिंदर सिंह और हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल के बीच बयानों की जंग छिड़ गई है। भाजपा का कहना है कि किसान आंदोलन राजनीतिक बन गया है और इसे पंजाब शह दे रहा है जबकि कांग्रेस भी अब खुलकर किसानों के समर्थन में आ गई है जिसकारण माहौल पूरी तरह से गर्मा गया है।
पंजाब से शुरू हुआ किसान आंदोलन अब पूरी तरह से राजनीतिक शक्ल अख्तियार कर चुका है। इस आंदोलन को लेकर पंजाब की कांग्रेस सरकार और हरियाणा की भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार आमने-सामने हैं। दोनों सरकारें एक दूसरे को निशाने पर ले रही हैं। हरियाणा के भाजपा नेताओं का कहना है कि पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्‍यान में रखकर वहां की सरकार इसे हवा दे रही है। पंजाब के सीएम कैप्‍टन अमरिंदर सिंह किसानों को पंजाब से दिल्‍ली जाने से रोकने की हरियाणा सरकार की कोशिश पर सवाल उठा रहे हैं। इस मामले में वह तैश में हरियाणा के सीएम मनोहरलाल के बारे में बेहद तल्‍ख शब्‍दों का प्रयोग कर गए। मनोहरलाल ने इस पर आज शालीन अंदाज में जवाब दिया औरा बोले- वह कैप्‍टन की तरह के शब्‍दों का इस्‍तेमाल नहीं कर सकते।
दूसरी ओर, हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद सरकार और किसानों के बीच बातचीत का रास्‍ता खुला है। केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों के सामने बातचीत का प्रस्ताव रखकर इस रस्साकसी को खत्म करने की पहल की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई मुख्यमंत्री मनोहर लाल की मुलाकात के बाद केंद्र सरकार ने किसानों के सामने बातचीत की पेशकश की है।
पंजाब व हरियाणा के किसान नेता तीन कृषि कानूनों को रद करने की मांग कर रहे हैं। ये तीनों कृषि कानून पूरे देश में लागू हैं, लेकिन सबसे ज्यादा आंदोलन की हवा पंजाब से होकर बह रही है। हरियाणा के भी कुछ किसान आखिरी चरण में इस आंदोलन में शामिल हुए हैं। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। हरियाणा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस आंदोलन को जिस तरह से पंजाब की कांग्रेस सरकार और हरियाणा के कांग्रेस नेताओं का खुला समर्थन मिल रहा है, उससे साफ है कि सब कुछ रणनीतिक ढंग से अंजाम दिया जा रहा है।
हरियाणा के कांग्रेस नेताओं ने भी इस आंदोलन को हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आरंभ में कांग्रेस नेता हालांकि अपने घरों में ही बंद थे, लेकिन बाद में उन्होंने मोर्चेबंदी संभाल ली। हरियाणा के भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस व इसके नेता किसानों को भड़काने में पूरी तरह जुटे हुए हैं। किसानों के दिल्‍ली कूच के दौरान जिस तरह का माहौल बना उससे हरियाणा में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हद तब हो गई, जब लोक इंसाफ पार्टी के पंजाब के एक विधायक की मौजूदगी में समालखा और सोनीपत के बीच कुछ असामाजिक तत्वों ने इस आंदोलन में पाकिस्तान व इमरान खान जिंदाबाद के नारे लगाए। इन नारों के बाद केंद्र व हरियाणा की खुफिया एजेंसियां चैकस हो गई हैं। उनकी कोशिश है कि किसानों के आंदोलन की आड़ लेकर कोई असामाजिक तत्व किसी तरह से माहौल को खराब करने की कोशिश न करे।
भाजपा नेता‍ओं का कहना है कि भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार भी किसानों के हित में हैं। भाजपा के पास किसान नेता के रूप में ओमप्रकाश धनखड़, बीरेंद्र सिंह, सुभाष बराला, जेपी दलाल, रणजीत चैटाला और कैप्टन अभिमन्यु सरीखे नेता मौजूद हैं। भाजपा के साथ साझीदार जजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं डिप्टी सीएम दुष्यंत चैटाला भी किसानों की सुविधाओं के हक में हैं। हालांकि पिछली बार जब पिपली में किसानों पर बल प्रयोग हुआ, उस समय विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया था, लेकिन गृह मंत्री अनिल विज साफ तौर पर इन्कार कर चुके थे कि बल प्रयोग नहीं हुआ।
हरियाणा सरकार का कहना है कि इसके बाद अब पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को साफ निर्देश थे कि कोरोना की वजह से किसानों को भले ही दिल्ली जाने से रोका जाए, लेकिन उन पर न तो बल प्रयोग होना चाहिए और न ही गोली या लाठी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ऐसा हुआ भी।
इसके बाद अब जिस तरह से किसानों के आंदोलन को राजनीतिक हवा मिल रही है, उसे लेकर भाजपा व जजपा नेताओं ने मोर्चा संभालते हुए केंद्र सरकार से बीच का रास्ता निकालने का अनुरोध किया है, ताकि पंजाब की कैप्टन सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर किसानों की भावनाओं का दुरुपयोग न कर सके। कांग्रेस जिस तरह से सत्तारूढ़ दल पर हमलावर है, ठीक उसी तरह से गठबंधन के नेताओं द्वारा उनका पुरजोर जवाब दिया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि अमित शाह से मनोहर लाल की बातचीत के बाद अगले कुछ घंटों में यह आंदोलन किसानों के हित में निर्णायक दौर में पहुंच सकता है।

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