नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/वाॅशिंगटन/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने देश में अश्वेत नागरिकों के प्रदर्शन पर पुलिसिया कार्रवाई की तुलना 1960 के दशक में नागरिक अधिकार आंदोलन के दौरान किए गए अत्याचारों से की है। अमेरिका के प्रसिद्ध अश्वेत सांसद जॉन लुइस के निधन के बाद आयोजित श्रद्धांजलि सभा में ओबामा ने ये बात कही। ओबामा ने ट्रंप प्रशासन पर पोस्टल वोटिंग की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को वोटिंग के उनके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रखा जाए। इसके साथ ही उन्होंने देश की संसद से वोटिंग कानून को पास करने की अपील भी की।
यहां बता दें कि करीब 3 दशक तक अमेरिकी संसद के सदस्य रहे लुइस का 17 जुलाई को 80 साल की उम्र में निधन हो गया था। लुइस को अश्वेत नागरिकों की बड़ी आवाज माना जाता था। उन्होंने 1960 के दशक में महान अमेरिकी आंदोलनकारी मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नेतृत्व में नस्लवाद के खिलाफ अफ्रीकी-अमेरिकी अश्वेत नागरिकों द्वारा देशभर में हुए जन अधिकार आंदोलन में हिस्सा लिया था। इस दौरान 1965 में अलाबामा के सेल्मा में पुलिस ने आंदोलनकारियों पर जबरदस्त कार्रवाई की थी और उनकी डंडों से पिटाई की थी। उस दौरान युवा जॉन लुइस भी इनमें शामिल थे. इसी आंदोलन पर पुलिस की बर्बरता की तुलना ओबमा ने हाल ही में देश में हुए अश्वेत आंदोलन से की।
मई के महीने में मिनिसोटा में जॉर्ड फ्लॉयड की अमेरिकी पुलिस की हिरासत में मौत हो गई थी, जिसके बाद देशभर में जबरदस्त आंदोलन हुए। इसके बारे में बोलते हुए ओबामा ने कहा, “बुल कॉनर भले ही न हों, लेकिन आज भी पुलिस कर्मियों को अश्वेत अमेरिकी नागरिकों की गर्दन पर बैठा देखते हैं। जॉर्ज वॉलस अब हमारे बीच न हों, लेकिन हम देख रहे हैं कि हमारी संघीय सरकार शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे लोगों पर आंसू गैस और लाठी बरसाने के लिए एजेंटों को भेज रही है।”
ओबामा ने साथ ही ट्रंप प्रशासन पर पोस्टल वोटिंग की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को वोटिंग के उनके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रखा जाए। ओबामा का ये बयान ऐसे वक्त में आया है, जब गुरुवार को ही राष्ट्रपति ट्रंप ने कोरोना महामारी का हवाला देते हुए इस साल होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में देरी का सुझाव दिया था।


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