एन-32 विमान की गर्जन से अचानक चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी हुई अलर्ट

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एन-32 विमान की गर्जन से अचानक चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी हुई अलर्ट

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/देहरादून/नई दिल्ली/मनोजीत सिंह/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- उत्तरकाशी जिले में स्थित चिल्यान्डीसौड हवाई पट्टी में आज अचानक आसमान गरजने लगा। थोड़ी देर में आसमान में भरी भरकम हवाई जहाज दिखाई दिया। सूत्रों के अनुसार भारत-चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के बीच आज एयर फोर्स के एन -32 मालवाहक विमान ने चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी में की लैंडिंग की और टेक-ऑफ किया।
एक तरह से यह चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर लेंडिंग का अभ्यास था. एयर फोर्स ऐसा अभ्यास करती रहती है. एमरजेंसी एयरपोर्ट जो सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं उनको बीच बीच में टेस्ट करती रहती है. इस दौरान विमान में सवार कोई भी अधिकारी या जवान विमान से नीचे नहीं उतरा। फिर वहां से सीधे अपने एयर बेस कैम्प के लिए रवाना हो गया .एयर फोर्स गत वर्ष चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी में लड़ाकू विमानों के टेक ऑफ और लैंडिंग सहित सामान छोड़ने का ऑपरेशन गगन शक्ति नाम से अभ्यास कर चुका है।इसमें अधिकतम 50 लोग सवार हो सकते हैं।
एयर फोर्स पिछले दो वर्षों से लगातार अपने विमानों का अभ्यास करवा रहा है। ।छ 32 विमान की बात करें। तो एक वर्ष में वायुसेना के मालवाहक विमान का चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी में ये दूसरा अभ्यास है। इससे पूर्व सितंबर 2018 को ।छ 32 मालवाहक विमान ने चिन्यालीसौड़ में टेक ऑफ और लैंडिंग का अभ्यास किया था।चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी से अंतरराष्ट्रीय सीमा की दूरी महज 125 से 130 किमी के बीच में है। इसलिए यह हवाई पट्टी सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। भारत अपनी तरफ से कोई कसार नहीं छोड़ता चाहता इस बार चीन के साथ जो भी तनावपूर्ण रिश्ते हुए हैं. आखिर भारत ने चीन को पीछे हटने को मजबूर कर दिया लद्दाख में. चींकी हरकतों को देखते हुए उस पर यकीन करना ठीक नहीं है .

क्या है एन -32 मालवाहक विमान-
एन-32 का पूरा नाम ।दजवदवअ-32 है. नाटो इसे ब्सपदम नाम से पुकारता है।
1976 में पहली बार बने इस विमान की कीमत 15 मिलियन डॉलर है।
इस मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में दो इंजन लगे होते हैं।
यह विमान 55 डिग्री सैंटीग्रेड से भी अधिक के तापमान में टेक ऑफ कर सकता है और 14, 800 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है।
इस विमान में पायलट, को-पायलट, गनर, नेविगेटर और इंजीनियर सहित 5 क्रू-मेंबर होते हैं।
इसमें अधिकतम 50 लोग सवार हो सकते हैं।
जीपीएस से लैस इस विमान में मौसम की जानकारी देने वाला रडार और मॉडर्न नेविगेशन सिस्टम होता है।
एन-32 भारतीय वायुसेना के मध्यम श्रेणी के विमान सेवा के लिए रीढ़ की हड्डी है।
भारतीय वायुसेना के बेड़े में इस वक्त करीब 100 एन-32 विमान हैं जो मुख्य तौर पर ट्रांसपोर्ट के काम में लगे हैं।
इस वक्त दुनिया में करीब 240 विमान ऑपरेशनल हैं। इस वक्त भारतीय वायुसेना के अलावा श्रीलंका, अंगोला और यूक्रेन की वायुसेना के पास भी ये विमान हैं।
ये विमान रूसध्यूक्रेन में बनाए जाते हैं. भारतीय वायुसेना के पास यूक्रेन के अपग्रेडेड एन-32 विमानों की खेप है।

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