बिहार में अकेले चुनाव लड़ेगी लोजपा, चिराग पासवान ने किया ऐलान

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

April 2024
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
April 20, 2024

हर ख़बर पर हमारी पकड़

बिहार में अकेले चुनाव लड़ेगी लोजपा, चिराग पासवान ने किया ऐलान

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने आज हुए संसदीय दल की बैठक के बाद स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अकेले ही बिहार में चुनाव लड़ेगी। आज हुई लोक जनशक्ति पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ने का फैसला सर्व सम्मति से लिया गया, साथ ही साथ बिहार में एलजेपी-बीजेपी सरकार बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
बिहार चुनाव से पहले नीतीश कुमार को एनडीए की सहयोगी पार्टी एलजेपी से झटका लगा है। एलजेपी ने नीतीश के नेतृत्व में चुनाव ना लड़ने का फैसला किया है। एलजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में एलजेपी और बीजेपी की सरकार बनाने को लेकर प्रस्ताव पास हुआ। इसके साथ ही बैठक में फैसला हुआ कि एलजेपी के सभी विधायक पीएम मोदी को और मजबूत करेंगे।
बता दें कि एलजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक शनिवार को ही होनी थी, लेकिन पार्टी के संस्थापक और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान की तबियत अचानक से खराब हो गई और उन्हें दिल का ऑपरेशन शनिवार की रात करना पड़ा जिसके कारण बैठक स्थगित कर दी गई। इसके बाद रविवार को यह अहम बैठक हो हुई है। एलजेपी एक साल से बिहार फस्ट के माध्यम से उठाए गए मुद्दों पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। जानकारी के मुताबिक एलजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में सभी सदस्य मौजूद रहे। कोरोना के चलते पशुपति नाथ पारस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े। बैठक की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान ने की। इसके अलावा सूरजभान सिंह, चंदन सिंह, वीणा देवी, राजू तिवारी, प्रिंस राज, काली पांडेय व अब्दुल खालिद भी मौजूद रहे।
हालांकि बिहार में सीट बंटवारे को लेकर जेडीयू भाजपा के साथ 50: 50 के अनुपात में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सहमत हो गई है। लेकिन अब एलजेपी के अलग होने की स्थिति में वह ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है। ऐसा होने पर बीजेपी को एक नई मांग से सहमत होने में परेशानी हो सकती है क्योंकि इसका मतलब है कि अपने हिस्से को कम करना पड़ सकता है।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox