नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- ऐसे ही देश में गाय को गौमाता नही कहा जाता है। गाय का दूध जितना प्रोटीन व विटामिन से भरपूर होता है ठीक वैसे ही गाय का गोमूत्र भी अपने आप में अमृत के गुण रखता है। जी हां हम बात कर रहे है गौ मूत्र की, जिसमें न केवल इंसान के असाध्य रोगों को ठीक करने की अपार क्षमता है बल्कि इसके सेवन से आप अपने शरीर में अब सोना, चांदी व जस्ते से मूल्यवान तत्वों की कमी को दूर कर सकते हैं। गीर गाय के गौ मूत्र में सोना, चांदी व जस्ते के प्रमाण अब सिद्ध हो गये है। यह खुलासा गुजरात के जुनागढ़ विश्वविद्यालय की लैब में जांच के दौरान हुआ है।
प्राचीन काल से गौमूत्र को दिव्य औषधी के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। आयुर्वेद में गौमूत्र औषधीय गुणों का विस्तृत से वर्णन भी किया गया है। वेद-पुराणों में गाय की महता का वर्णन किया गया है। द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने गाय को माता का दर्जा दिया था तभी से हिंदू धर्म में लोग गाय को माता के रूप में पूजते आ रहे है। वहीे बाबा रामदेव पिछले कई सालों से गोमूत्र के बारे में देश-विदेश में काफी व्याख्यान भी दे रहे है। हालांकि अभी तक दुनिया इसके सिर्फ औषधीय गुणों के बारे में कही सुनी बातों पर ही विश्वास कर रही थी लेकिन अब यह प्रमाणित हो गया है कि गाय का गोमृत्र वास्तव में दिव्य गुणों से भरपूर है। गुजरात की गीर नस्ल की गायों को पहले से श्रेष्ठ दर्जा प्राप्त था लेकिन वह श्रेष्ठ किस बात को लेकर थी उसका खुलासा अब हुआ है। दरअसल गीर गाय के गोमूत्र में सोना, चांदी व जस्ता मिलने की पुष्टि हो गई है। इसका खुलासा गुजरात के जुनागढ़ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है। कृषि विशेषज्ञों ने एक जांच में पाया है कि गीर गायों के गोमूत्र में सोना, चांदी व जस्ता विलयमान अवस्था में मौजूद होता है। वैज्ञानिकों ने अपने शोध की पुष्टि के लिए 400 गीर गायों के गोमूत्र की जांच पड़ताल की और पाया कि उनके गोमूत्र में सोना, चांदी व जस्ता मौजूद है।
जूनागढ़ विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों ने यह सिद्ध कर दिया है कि गाय को यूं ही श्रेष्ठता का दर्जा प्राप्त नही है। गायों में हकीकत में श्रेष्ठ गुण होते है। गाय के दूध में मां के दूध से ज्यादा पौष्टिकता व विटामिन होते हैं जिसकारण गाय को गौमाता भी कहा जाता है। वहीं गाय का गोमूत्र प्राचीन काल से असाध्य रोगों को ठीक करने में उपयोग होता रहा है। वैज्ञानिकों ने अब गोमूत्र में पाये जाने वाले सभी तत्वों को भी ढंूढ निकाला है। वैसे भी सोना, चांदी व जस्ते का हमारे शरीर पर काफी गहरा असर होता है लेकिन हम इन तत्वों को कई रूपों में प्रयोग करते है। अब गाये के गोमूत्र में सोना, चांदी व जस्ते की मात्रा मिलने से गाय की अहमीयत और भी बढ़ जायेगी और लोग इसको काटने की बजाये इसका सम्मान करने लगेंगे। हालांकि अभी तक इसका खुलासा नही हो पाया है कि सिर्फ गीर गायों में ही सोना, चांदी व जस्ता होता है या फिर और नस्लों मंे भी यह तत्व पाये जाते है। अभी देश की दूसरी नस्लों पर शोध चल रहा है हालांकि सभी गायों दूध व गोमूत्र उपयोग के श्रेष्ठ बताया गया है।


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