नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/देश-विदेश/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- देश की राजधानी दिल्ली में कृषि कानूनों के विरोध में ढाई माह से चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए अब विदेशी भी आगे आ रहे है। लेकिन क्या वास्तव में विदेशी किसान आंदोलन को समर्थन देना चाहते है या फिर कोई षडयंत्र रच रहे है। पुलिस की जांच में अब ये खुलासा सामने आ गया है कि देसी आंदोलन में विदेशी षडयंत्र का तड़का देश की छवि को धूमिल करने के लिए लगाया जा रहा है। भारत के खिलाफ साजिश को सफल बनाने में स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने बेहद शातिर तरीके से योजना बनाई थी जिसे गलती से इस योजना को उसने ट्वीट भी कर दिया था। लेकिन जैसे ही उनके खिलाफ आवाज उठी तो उन्होने इसे तुरंत डिलीट भी कर दिया। इसी तरह मिया खलीफा व रिहाना ने भी किसान आंदोलन के समर्थन की आड़ में भारत के खिलाफ प्रोपगेंडा किया। लेकिन दिल्ली पुलिस ने ग्रेटा थनबर्ग के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
अखर क्या लिखा ग्रेटा थनबर्ग ने अपने ट्विटर में- ग्रेटा थनबर्ग ने किसानों के समर्थन में किए गए अपने ट्वीट में भारत की सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी को फासीवादी पार्टी करार दिया। ग्रेटा ने ट्वीट कर बताया कि भारत सरकार पर किस तरह दबाव बनाया जा सकता है, इसके लिए उन्होंने अपनी कार्य योजना से संबंधित एक दस्तावेज भी साझा की। दस्तावेज को पढ़ने के बाद स्पष्ट होता है कि ग्रेटा किसी बड़ी भारत विरोधी प्रोपेगेंडा मुहिम की हिस्सा हैं। ग्रेटा थनबर्ग के इस ट्वीट से खुलासा हुआ कि गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा से लेकर अब तक जो हुआ, वो सब एक साजिश के तहत हुआ है और इसमें वैश्विक शक्तियां भी जुड़ी हुई हैं।
भारत विरोधी दस्तावेज में ग्रेटा थनबर्ग ने ये लिखा
ऑन ग्राउंड प्रोटेस्ट में हिस्सा ले – दस्तावेज में लोगों से कहा गया कि ऑन ग्राउंड प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने पहुंचें। किसान आंदोलन के साथ एकजुटता प्रदर्शन करने वाली तस्वीरें ई-मेल करें। ये तस्वीरें 25 जनवरी तक भेजें।
डिजिटल स्ट्राइक करें- आंदोलन से जुड़े फोटो विडियो और मैसेज के साथ 26 जनवरी से पहले या 26 जनवरी तक ट्विटर पर पोस्ट किए जाएं।
ट्विटर पर तूफान लाएं – 4-5 फरवरी को ट्विटर पर तूफान लाने की योजना बनाई गई, जिसमें किसान आंदोलन से जुड़ी चीजों, हैशटैग और तस्वीरों को ट्रेंड कराया जाएं। इसके लिए तस्वीरें, वीडियो मैसेज 5 फरवरी तक भेज दिए जाएं। आखिरी दिन 6 फरवरी का होगा।
भारत सरकार पर ऐसे बनाएं दबाव- किसान नेताओं और स्थानीय प्रतिनिधि से संपर्क स्थापित करें, इससे भारतीय सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनेगा।
भारतीय कारोबारियों को नुकसान पहुंचाएं – दो बड़े भारतीय व्यापारिक घरानों को हर हाल में कमजोर करना है, जो मोदी सरकार में गरीबों का उत्पीड़न कर रहे हैं। गरीबों की जमीन और मेहनत पर कब्जा कर रहे हैं, उनसे जमीन छीन रहे हैं।
दूतावास के बाहर करें प्रदर्शन- दस्तावेज में बताया गया है कि विदेशों में भारतीय दूतावासों के पास कब और कहां प्रदर्शन करना है। मीडिया हाउस, सरकारी इमारतों और अडानी-अंबानी के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करने की बात भी इसमें कही गई है।
बता दें कि ग्रेटा थनबर्ग दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए जानी जाती हैं और इसके लिए उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी आलोचना की थी।
भारत के खिलाफ मुहिम कभी सफल नहीं होगी- जयशंकर
भारत के खिलाफ चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने ट्वीट कर कहा कि भारत को निशाना बनाकर चलाए जा रहे अभियान कभी सफल नहीं होंगे। हमें खुद पर विश्वास है, हम अपने दम पर खड़े रहेंगे। भारत इस साजिश को कामयाब नहीं होने देगा।
इससे पहले, विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर कहा था कि विदेशी हस्तियों को इस तरह के अभियानों का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। ग्रेटा थनबर्ग के अलावा रिहाना और मिया खलीफा जैसे विदेशी सेलिब्रिटीज ने किसान आंदोलन पर ट्वीट किए थे।


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