चीन की पीपीई किट्स हो गई फेल, भारत ने जताया ऐतराज

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चीन की पीपीई किट्स हो गई फेल, भारत ने जताया ऐतराज

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- देश भर में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं जिसे देखते हुए भारत सरकार ने चीन से करीब डेढ़ करोड़ पीपीई किट्स मंगाने का आर्डर किया था लेकिन इसी बीच चीन की कुछ कंपनियों ने भारत को दान स्वरूप कुछ किट्स दी थी जिनमें से अधिकतर जांच के दौरान फेल हो गई जिसका भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है।
                                        द इकॉनमिक टाइम्स के अनुसार इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि चीन से 1,70,000 पीपीई किट्स आई हैं, जिसमें 50,000 किट्स क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गईं। अधिकारी ने बताया कि 30,000 और 10,000 किट्स के दो छोटे कंसाइनमेंट्स भी आये थे जो टेस्ट में फेल हो गये हैं। ये किट्स डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन लेबोरेट्री ग्वालियर में टेस्ट की गईं थीं। इसका भारत ने चीन के समक्ष कड़ा ऐतराज दर्ज कराया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक और सरकारी अधिकारियों ने कहा कि वे केवल सीई/एफडीए सैरटिफाइड पीपीई किट ही खरीद रहे हैं। दान के रूप में प्राप्त कुछ किट्स गुणवत्ता परीक्षण में विफल रहे और उनका उपयोग नहीं किया जा सकता है। वहीं इस मामले से जुड़े व्यक्ति ने कहा कि एफडीए/सीई- स्वीकृत को भारत में गुणवत्ता परीक्षण पास करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, जो किट्स टेस्ट में फेल पाई गईं। वे भारत में चीन की बड़ी निजी कंपनियों से दान के रूप में मिली थीं। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी प्लानिंग के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि कमी को पूरा करने के लिए व्यापारियों के माध्यम से एक अतिरिक्त 1 लाख सूट का ऑर्डर दिया गया है, जिसमें एक सिंगापुर की कंपनी भी शामिल है हालांकि, सभी सूट चीन से ही लिए जाएंगे।
घरेलू निर्माण में आ रही तेजी
रिपोर्ट के अनुसार, शख्स ने कहा कि मई के पहले वीकेंड तक हमारे पास ये सूट होने चाहिए. उन्होंने कहा कि और ऑर्डर दिए जा रहे हैं। सरकार का अनुमान है कि अगर भारत में 2 मिलियन पीपीई सूट हों तो भारत अच्छी स्थिति में होगा। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि ऑर्डर्स की संख्या बढ़ रही है। लेकिन अभी चीन इन चीजों का सबसे बड़ा निर्यातक है। हम पहले आयात पर पूरी तरह से निर्भर थे और कभी उम्मीद नहीं थी कि मांग में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि घरेलू विनिर्माण में अब तेजी आ रही है और जल्द ही हम इस मामले में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ दूसरे देशों को भी यह सामान निर्यात कर सकेंगे।

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