बनारस/उमा सक्सेना/- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के राजीव गांधी दक्षिण परिसर, बरकच्छा (मिर्जापुर) में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की सॉफ्टबॉल कार्यशाला का दूसरा दिन बेहद सफल रहा। “सॉफ्टबॉल में उन्नत नियम, ऑफिशिएटिंग और कोचिंग तकनीक” विषय पर केंद्रित इस कार्यशाला में देशभर से आए प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। दिन की शुरुआत प्रातःकालीन प्रायोगिक सत्र से हुई, जिसमें विशेषज्ञ कोच प्रसन्ना कुमार ने खिलाड़ियों को विभिन्न तकनीकी अभ्यास और खेल कौशल सिखाए। इस दौरान खिलाड़ियों, कोचों और शोधार्थियों सहित 50 से अधिक प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
तकनीकी सत्रों में मिली गहन जानकारी
दूसरे सत्र में तकनीकी व्याख्यान आयोजित किए गए, जहां जितेंद्र मेवाड़ा ने ऑफिशिएटिंग मैकेनिक्स पर विस्तार से जानकारी दी और खेल के दौरान सही निर्णय लेने की अहमियत को समझाया। इसके बाद पंकज सिंह ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन, आतिथ्य प्रबंधन और खिलाड़ियों की फिटनेस से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। इन सत्रों ने प्रतिभागियों को खेल की बारीकियों को समझने का अवसर प्रदान किया।
मैदान पर अभ्यास के साथ दिन का समापन
दिन के अंतिम चरण में प्रायोगिक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने सीखे गए सैद्धांतिक ज्ञान को मैदान पर लागू किया। इस दौरान खिलाड़ियों ने टीमवर्क, तकनीक और निर्णय क्षमता का प्रदर्शन किया, जिससे कार्यशाला का उद्देश्य और भी स्पष्ट हुआ।
तीसरे दिन का कार्यक्रम और समापन समारोह
कार्यशाला का अंतिम दिन प्रातः 6 बजे से शुरू होगा, जिसमें प्रसन्ना कुमार के निर्देशन में प्रायोगिक सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके बाद मुकुल देशपांडे सॉफ्टबॉल के नवीनतम नियमों पर जानकारी देंगे। साथ ही पंकज सिंह और जितेंद्र मेवाड़ा अपने-अपने विषयों पर व्याख्यान देंगे। दोपहर में भव्य समापन समारोह के साथ इस राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन होगा।
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
समापन समारोह में प्रो. बी. सी. कापरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि डॉ. दीपक कुमार डोगरा और मुकुल देशपांडे विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. बी. एम. एन. कुमार करेंगे और आयोजन का संचालन डॉ. किरण आर्या द्वारा किया जाएगा।
खेल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
यह कार्यशाला सॉफ्टबॉल खेल के तकनीकी विकास, कोचिंग सुधार और ऑफिशिएटिंग मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रही है। इससे न केवल खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि देश में इस खेल को नई पहचान भी मिलेगी।


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