पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, जीएसटी और ई-वे बिल के विरोध में भारत बंद का देश में मिला जुला रहा असर

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पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, जीएसटी और ई-वे बिल के विरोध में भारत बंद का देश में मिला जुला रहा असर

-देशभर के व्यापारी संगठनों द्वारा 26 फरवरी को पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, जीएसटी और ई-वे बिल के विरोध में भारत बंद की अपील की गई थी.

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- देशभर के व्यापारी संगठनों द्वारा शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, जीएसटी और ई-वे बिल के विरोध में भारत बंद कुछ इलाकों में इसका मिलाजुला असर दिखा। वहीं कहीं-कहीं इसका व्यापक असर देखने को मिला। अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ द्वारा बुलाए गए भारत बंद का यहां के व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन कामरूप चैंबर ऑफ कॉमर्स ने अपना समर्थन दिया है. इस दौरान चैंबर ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने राज्य के सभी व्यापार संगठनों से बंद रखने का अनुरोध किया हैं। इसके अलावा ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के समर्थन से बनी क्षेत्रीय पार्टी असम जातीय परिषद ने भी भारत बंद का समर्थन किया है।
आईये जानते है कहां कितना रहा भारत बंद का असर-
छत्तिसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, अंबिकापुर, दुर्ग और धमतरी में छोटी दुकानें तो खुली रहीं लेकिन बड़े कारोबारियों ने दोपहर तक अपनी दुकानें बंद रखीं. राज्य के अधिकांश शहरों में थोक कारोबार लगभग पूरी तरह बंद रहा।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जीएसटी प्रवधानों के खिलाफ कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के शुक्रवार बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। पुराने भोपाल के इलाके में ज्यादातर दुकानें बंद रही. वहीं नये शहर में कुछ दुकानें खुली नजर आई.शहर में ज्यादातर व्यापारियों ने स्वेच्छा से बंद का पालन किया। यहां दुकानदारों ने फैसला किया था कि वो दुकानें दोपहर के 2 बजे तक बंद रखेंगे और उसके बाद ही खोलेंगे. भोपाल में थोक व्यापारियों ने पूरी तरह से बंद के समर्थन में अपनी दुकानों को बंद रखा। कैट ने इस बंद को 70 व्यापारिक संगठनों का समर्थन हासिल है. इस बंद का मकसद केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का है ताकि जीएसटी की विसंगतियों को दूर किया जा सकें।
असम की राजधानी शहर गुवाहाटी में सुबह से बाजार-व्यापार बंद रहे. बंद के कारण गुवाहाटी की सड़कों पर कम सिटी बसों के चलने से आम जनजीवन प्रभावित हुआ। सभी तरह केवाणिज्यिक परिवहन सड़कों से नदारद दिखे. भारत बंद के तहत नगांव, जोरहाट, गोलाघाट, शिवसागर, डिब्रूगढ़, तीनसुकिया जैसे बड़े शहर पूरी तरह बंद रहे।
राजस्थान में व्यापारियों ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ गई है और महंगाईचरम पर है. ऐसे में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। कोविड-19 के कारण व्यापार पहले ही खत्म हो चुका है और जीएसटीकी उलझनें परेशान कर रही है। लोगों के हाथ में पैसा होगा तब न व्यापार चलेगा? परेशानियाँ इतनी हैं, लेकिन इस सरकार को कोई फर्क ही नहीं पड़ता।
शुक्रवार को बुलाए गए भारत बंद का राजस्थान में खास देखने को नहीं मिला. बीकानेर, अलवर, जोधपुर और कोटा में कुछ जगहों को छोड़ कर अन्य राजस्थान में व्यापारियों ने बाजार खुले रखे। राजधानी जयपुर में गुरुवार को ही कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स और जयपुर के व्यापारिक संगठनों ने भारत बंद को स्थगित करने का फैसला लिया। संगठनों ने शुक्रवार को जयपुर सांसद रामचरण बोहरा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। संगठनों का कहना है कि जीएसटी में विसंगतियों से व्यापारियों को परेशानी आ रही है, इनको परिवर्तित करना चाहिए.।
कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जयपुर अध्यक्ष सचिन गुप्ता ने कहा, “हमने जयपुर में बंद स्थगित कर दिया था। हम व्यापारियों ने सांसद रामचरण बोहरा को इस संबंध में ज्ञापन दिया है। केंद्र में भाजपा की सरकार है और जयपुर से भाजपा के ही सांसद हैं। इसलिए हमने उनसे अपनी मांग रखीं।
गुप्ता ने बताया कि, सांसद बोहरा ने हमारे सामने राजस्थान के जीएसटी कमिश्नर सीपी गोयल से बात की है। कमिश्नर गोयल ने हमें आश्वासन दिया है कि अगले सप्ताह व्यापारियों के साथ एक मंच पर बैठ कर व्यापारियों की समस्याओं का निराकरण करने पर चर्चा होगी। व्यापारियों का कहना है कि“व्यापारी कानून की पेचीदगी में फंस कर व्यापार नहीं कर पा रहे हैं। व्यापारियों की मांग है कि जीएसटी को सरल किया जाए।

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