नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- एशिया की सबसे बड़ी फल एवं सब्जी मंडी में इन दिनों दहशत का माहौल है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में मंडी के एक आढ़ती भोलानाथ की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। इसके बाद तो मानो व्यापारियों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एपीएमसी यानि एग्रीकल्चर प्रोडयूस मार्किटिंग कमेटी, आजादपुर मंडी के सदस्य अनिल मल्होत्रा सहित कई व्यापारियों ने मंडी में पूर्ण लॉकडाउन की वकालत की।
आपको बता दें कि भोलानाथ की मौत के बाद फल मंडी से जुड़ी कई एसोसिएशनों की बैठक हुई। इसमें फैसला लिया गया है कि काम बंद किया जाएगा लेकिन, सभी एकमत नहीं हो पाए। इसी बीच बाजार में ये अफवाह घूमने लगी कि मंडी बंद हो रही है। जैसे ही अफवाह ने पैर पसारने शुरु किए वैसे ही मंडी प्रशासन भी तुरंत हरकत में आ गया। उधर, मंडी प्रशासन ने इसे अफवाह बताया तो दूसरी ओर मंडी की लगभग 300 दुकानें बंद पाई गई। हालांकि, प्रशासन ने इसे भी अफवाह करार दिया लेकिन, व्यापारियों ने दुकानें बंद होने की पुष्टि की। इन सबके बीच मंडी में रैपिड टैस्टिंग की शुरुआत की गई है। ‘शुक्रवार को 12 डॉक्टरों की एक टीम ने अलग-अलग ग्रुप बनाकर मंडी में काम करने वाले 400 से ज्यादा लोगों की जाँच की। इसी बीच, भोलानाथ के पार्टनर नंदलाल की पहली कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने से प्रशासन ने कुछ राहत की सांस जरूर ली है। इसके बावजूद मंडी के व्यापार से जुड़े कुछ लोगों में कोरोना पाजिटिव होने की पुष्टि हुई है। इस समय मंडी का व्यापारी और कर्मचारी, हर कोई डरा-सहमा हुआ है। एक तरफ सरकार का आदेश है तो दूसरी तरफ कोरोना का खतरा। यकीन, मानिए कि आने वाले दिनों में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती है तो ना चाहते हुए भी आजादपुर मंडी को बंद करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होगा।


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