आखिर एक ही कालोनी में तोड़फोड़ के पीछे क्यो पड़ा है प्रशासन, कार्यवाही पर उठी रही उंगली

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आखिर एक ही कालोनी में तोड़फोड़ के पीछे क्यो पड़ा है प्रशासन, कार्यवाही पर उठी रही उंगली

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- नजफगढ़ में शुक्रवार को एक बार फिर सुरखपुर रोड़ पर स्थित कालोनी में प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्यवाही को अंजाम दिया। तीन दिन पहले भी इसी कालोनी में प्रशासन ने पूरे दलबल के साथ तोड़फोड़ की कार्यवाही की थी जिसमें एसडीएम नजफगढ़ व कानूनगों को कुछ लोगों ने पकड़कर पीट भी दिया था। आज की कार्यवाही को देखते हुए लोगों का कहना है कि आखिर इसी कालोनी में ही बार-बार तोड़फोड़ की कार्यवाही क्यों हो रही है, यह बात लोगों के गले नही उतर रही है। हालांकि पहले की कार्यवाही के दौरान एसडीएम ने पुलिस की कार्यशैली पर उंगली उठाई थी और एसएचओ बाबा हरिदास नगर थाने की शिकायत कमिश्नर तक को की गई थी।


आज की कार्यवाही के लिए नजफगढ़ एसीपी विजय सिंह व बाबा हरिदास नगर एसएचओ जगतार सिंह ने वीरवार को ही सुरखपुर रोड़ पर कार्यवाही की जगह के दोनो तरफ बैरिकेटिंग करा दी थी और सारे मकान खाली करवा दिये थे ताकि आज पहले की तरह जैसी कोई कार्यवाही न हो। सुबह से ही पुलिस अपने पूरे दलबल के साथ तोड़फोड़ वाली जगह पर तैनात थी जिसमें बाबा हरिदास नगर, नजफगढ़, मोहनगार्डन, छावला थाने के एसएचओ अपने दलबल के साथ मौजूद थे। इसके साथ ही नजफगढ़ व छावला व द्वारका के एसीपी भी मौजूद थे। साथ ही एडिशनल डीसीपी व डीसीपी द्वारका ने भी मौके का मुआयना व निरिक्षण किया तथा कार्यवाही की जगह व आसपास के क्षेत्र में कानून व्यवस्था का निरिक्षण किया। राजस्व विभाग से एसडीएम विनय कुमार, तहसीलदार सुभाष यादव, सिविल डिफेन्स के डीडब्ल्यू राकेश कुमार भी अपनी पूरी टीम के साथ मौजूद रहे। एसडीएम के आदेश पर चार जेसीबी तोड़फोड़ के कार्यवाही में तीन बजे तक जुटी रही। और पुलिस ने पूरी सतर्कता के साथ प्रशासन के काम में सहयोग किया। इस दौरान प्रशासन ने कालोनी में बने करीब 15 मकानों को जमींदोज कर दिया। लेकिन साढ़े तीन बजे के करीब जब द्वारका कोर्ट ने इस तोड़फोड़ की कार्यवाही को रोकने के आदेश जारी कर दिये तभी प्रशासन ने कार्यवाही बंद की। हालांकि इस दौरान प्रशासन ने कालोनी के लगभग 70 प्रतिशत मकानों को तोड़ दिया था जिसमें ज्यादातर गरीबों के मकान थे। और ये मकान उन्होने उधार लेकर ही बनाये थे।
कालोनीवासियों की माने तो दिल्ली सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और गरीबों के तोड़े गये मकानों का मुआवजा देना चाहिए। लोगों का आरोप है कि इस सारे मामले में सिर्फ बेकसूर प्लाॅट धारक ही पीड़ित हुए है। अगर यह काम अवैध था तो प्रशासन की नाक के नीचे कैसे कालोनियां बस रही है। इसका कोई जवाब नही दे रहा है। लोगों का यह भी सवाल है कि अगर यह काम गलत था तो फिर प्रशासन के उन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही क्यो नही हो रही जिन्होने पैसे लेकर ये कालोनियां कटवाई है। या जिनके कार्यकाल में ये काम हुआ है। इसमे निगम, पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारी बराबर के दोषी है। लोगों का कहना है कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर सरकार को कार्यवाही करनी चाहिए।

आखिर कैसे बढ़ा यह विवाद
लोगों की माने तो करीब एक सप्ताह पहले विधायक के कुछ आदमी, निगम से व राजस्व विभाग से तहसीलदार व कानूनगों कालोनी में आये थे। जिन्होने डीएम व एसडीएम के नाम पर पैसे मांगे थे। लेकिन कालोनीवासियों ने इसे लेकर मना कर दिया तो अधिकारी नाराज हो गये और ये तोड़फोड़ की कार्यवाही कर दी। लोगों का यह भी आरोप है कि इस कालोनी से कई बार पुलिस, निगम व राजस्व विभाग के अधिकारी बार-बार पैसे लेकर जा चुके है। लेकिन फिर भी ये लोग मान नही रहे हैं जबकि इन कालोनियों में अधिकतर गरीब लोगों के प्लाॅट है और उनमें भी अधिकतर लोगों ने ब्याज पर उधार पैसा लेकर मकान बनाये हुए हैं। लोगों का आरोप है कि कालोनाइजरों व अधिकारियों का इसमें कुछ नही बिगड़ा बस गरीब लोग मारे गये जो अब कभी जीवन भर अपने मकान का सपना पूरा नही कर पायेंगे।

कोर्ट के फैसले का भी नही किया इंतजार
लोगों का आरोप है कि आखिर प्रशासन को इस कालोनी को तोड़ने की इतनी जल्दी क्यों थी कि अधिकारियों ने कोर्ट के फैसले का भी इंतजार नही किया। कुछ तो गड़बड़ है। उन्होने डीसीपी द्वारका से इस मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि आम आदमी पार्टी के नेता खुलकर कालोनियों में जाकर पैसे मांग रहे हंै और कोई कुछ नही कर रहा है।

एसडीएम ने कैटल फार्म के नाम पर दी थी चारदिवारी की इजाजत
इस कालोनी में एसडीएम सतीश कुमार गुप्ता ने कैटल फार्म के नाम पर चारदिवारी करने की इजाजत दी थी। हालांकि इस जमीन में प्लाॅटिंग की कार्यवाही एसडीएम सतीश गुप्ता के समय में ही शुरू हो गई थी। लेकिन श्री गुप्ता ने कभी भी कोई कार्यवाही नही की। लेकिन जब विवाद ज्यादा बढ़ा तो चलते-चलते एसडीएम कुछ जमीनों पर री-इनस्टेट के आर्डर कर गये जिनके तहत अब कार्यवाही की जा रही है।

पूर्व एसडीएम ने की थी 21 अवैध कालोनियां चिंहित, 18 को जारी किये थे नोटिस
विभागीय कार्यवाही की माने तो पूर्व एसडीएम सतीश कुमार गुप्ता ने नजफगढ़ विधानसभा में 21 अवैध कालोनियां चिंहित की थी। लेकिन नोटिस सिर्फ 18 कालोनियों के जारी किये थे। इसके बाद आये एसडीएम विनय कुमार ने जब कार्यवाही आरंभ की तो पहली ही तोड़फोड़ में बवाल मच गया। हालांकि डीएम राहुल सिंह यह नही बता पा रहे है कि और कालोनियों पर कार्यवाही होगी या नही या फिर अधिकारी उन कालोनियांे में सैटिंग कर मामला रफा-दफा कर देंगे जैसा की अब तक होता आया है। और भूमाफिया से मिलकर अधिकारी अवैध कालोनियां बसा रहे हैं जिसमें गरीब लोग उनके भ्रष्टाचार का शिकार बन रहे है।

द्वारका कोर्ट से मिला तोड़फोड़ के खिलाफ स्टे आर्डर, लोगों ने कहा क्या फायदा
बताया जा रहा है कि द्वारका जिला कोर्ट से सुरखपुर रोड़ स्थित कालोनी को स्टे आर्डर मिल गया है। कालोनीवासियों ने तोड़फोड़ के खिलाफ एक याचिका कोर्ट में लगाई थी जिसपर आज कोर्ट ने स्थगन के आदेश जारी कर दिये हैं।

डीएम राहुल सिंह ने इस मामले में कुछ भी कहने से किया इंकार
जिला दक्षिण-पश्चिम डीएम राहुल सिंह ने इस मामले में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है। उन्होने इतना जरूर कहा कि जिले में जहां भी अवैध कालोनियां बसाई गई है सबको चिंहित कर लिया गया है और सबको तोड़ा जायेगा।

एसडीएम नजफगढ़ ने कहा दूसरी कालोनियों में भी होगी कार्यवाही
एसडीएम नजफगढ़ विनय कुमार कौशिक ने कहा कि नजफगढ़ में अभी तक कुल 21 अवैध कालोनियां चिंहित की गई है। जिनमे से 18 कालोनियों के जमीन मालिकों के खिलाफ नोटिस जारी हो चुके हंै। जैसे ही डीएम साहब आर्डर जारी करेंगे कार्यवाही की जायेगी। उन्होने कहा कि अभी उन्हे कोर्ट से कोई स्टे आर्डर नही मिला है। अभी कालोनी में कार्यवाही जारी रहेगी। उन्होने तीन दिन पहले इसी कालोनी में हुई मारपीट के मामले में बताया कि वह किसी दुर्भावना से काम नही कर रहे है सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रहे है। डीएम साहब ने कालोनी में तोड़फोड़ के आदेष दिये हैं।

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