महिला आरक्षण कानून को लेकर हलचल तेज, संसद में जल्द आ सकते हैं नए विधेयक

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September 5, 2026

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नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-  देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। मौजूदा बजट सत्र के दौरान सरकार महिला आरक्षण कानून को प्रभावी बनाने के लिए दो नए विधेयक पेश कर सकती है। जानकारी के अनुसार, सरकार इस कानून को परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से पहले लागू करने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिससे लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता जल्द साफ हो सके।

विपक्ष ने उठाई सर्वदलीय बैठक की मांग
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी अपनी सक्रियता दिखाते हुए सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर सभी दलों की सहमति जरूरी है, इसलिए विधानसभा चुनावों के बाद व्यापक चर्चा कर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। विपक्षी नेताओं का मानना है कि बिना सामूहिक विचार-विमर्श के कानून का लागू होना कई सवाल खड़े कर सकता है।

सरकार बना रही सहमति का माहौल
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। अलग-अलग दलों के नेताओं से बातचीत कर समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा सीटों की संख्या में बढ़ोतरी कर महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में सीटें आरक्षित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे महिला प्रतिनिधित्व में ऐतिहासिक वृद्धि हो सके।

महिला नेताओं ने जताया समर्थन
सरकार की इस पहल को विभिन्न दलों की महिला नेताओं ने सकारात्मक कदम बताया है। उनका मानना है कि इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और नीति निर्माण में उनकी भूमिका मजबूत होगी। कई सांसदों ने इसे सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम पहल करार दिया है, हालांकि कुछ नेताओं ने इसके लागू होने के तरीकों और नियमों को स्पष्ट करने की जरूरत भी बताई है।

क्या है कानून का आधार
गौरतलब है कि संविधान संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। अब सरकार इस व्यवस्था को जल्द लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, ताकि देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई मजबूती मिल सके।

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