सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी के बाद NCERT झुका, 8वीं की किताब नए सिरे से तैयार होगी

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August 20, 2026

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सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी के बाद NCERT झुका, 8वीं की किताब नए सिरे से तैयार होगी

-पूरा मामला क्या है, NCERT ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति!

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में हुई अनजाने गलती के लिए माफी मांग ली है। NCERT ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि पुस्तक के अध्याय में न्यायपालिका से जुड़े कुछ अनुचित और गलत सामग्री अनजाने में शामिल हो गई थी। इस कारण पुस्तक का वितरण तत्काल रोक दिया गया है और इसे उपयुक्त अधिकारियों के परामर्श से दोबारा लिखा जाएगा। नई संस्करण शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में कक्षा 8 के छात्रों को उपलब्ध कराया जाएगा।

कैसे शुरु हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब NCERT ने 24 फरवरी 2026 को कक्षा 8के लिए नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक ‘Exploring Society: India and Beyond, Part II’ जारी की। इसमें अध्याय 4 ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ में न्यायपालिका के सामने चुनौतियों का जिक्र करते हुए ‘न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार’, लंबित मामलों की भारी संख्या (सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81,000, हाई कोर्ट में 62 लाख से अधिक) और पर्याप्त जजों की कमी जैसी बातें शामिल थीं। इन बिंदुओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने इसे गंभीरता से लिया।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। उन्होंने NCERT की ओर इशारा करते हुए कहा कि संस्था की गरिमा और अखंडता पर दाग नहीं लगने दिया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा मामले को उठाए जाने पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे ‘In Re: Social Science Textbook for Grade-8 (Part 2) published by NCERT and ancillary issues’ नाम से दर्ज किया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे। कोर्ट ने 26फरवरी को सुनवाई तय की है।

NCERT ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति
NCERT ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह अनजाने में हुई गलती थी और न्यायपालिका को संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक मानते हुए ऐसी सामग्री शामिल करने का कोई इरादा नहीं था। परिषद ने कहा ‘हम न्यायपालिका के प्रति पूर्ण सम्मान रखते हैं और संस्थागत गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ NCERT ने पुस्तक को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है और बिक्री पर सख्त रोक लगा दी है। जहां कुछ प्रतियां बिकी थीं, वहां से उन्हें वापस मंगाया जा रहा है।

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