नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में रहे व्यापार समझौते को लेकर अब एक चौंकाने वाली वजह सामने आई है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने दावा किया है कि यह अहम ट्रेड डील किसी नीतिगत मतभेद या आर्थिक अड़चन के कारण नहीं, बल्कि केवल एक फोन कॉल न होने की वजह से अंतिम रूप नहीं ले सकी। उनके इस बयान के बाद भारत-अमेरिका संबंधों और व्यापारिक रिश्तों पर नई बहस शुरू हो गई है।
फोन कॉल न बनने से रुकी प्रक्रिया
अमेरिकी वाणिज्य सचिव के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का ढांचा लगभग पूरी तरह तैयार था। समझौते को अंतिम मंजूरी देने के लिए केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सीधी बातचीत होनी बाकी थी। लटनिक का कहना है कि यह बातचीत कभी नहीं हो सकी, जिसके चलते महीनों की मेहनत के बाद भी यह डील अधर में लटक गई।
पॉडकास्ट में किया दावा
‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ में बातचीत के दौरान हॉवर्ड लटनिक ने कहा कि यह सौदा पूरी तरह ट्रंप के नियंत्रण में था और अंतिम निर्णय भी उन्हीं को लेना था। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की ओर से ट्रंप को फोन न किए जाने के कारण समझौता आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत सरकार इस बातचीत को लेकर सहज नहीं थी, जिससे पूरी प्रक्रिया ठप हो गई।
अब पुरानी शर्तें अमान्य
लटनिक ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन शर्तों पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लगभग तय माना जा रहा था, वे अब लागू नहीं रहीं। उनके अनुसार, अमेरिका अब उन प्रस्तावों से पीछे हट चुका है, जिन पर पहले सहमति बन चुकी थी। यानी अब यदि बातचीत दोबारा शुरू भी होती है, तो शर्तें पहले जैसी नहीं होंगी।
टैरिफ का बढ़ता दबाव
इस बयान के बीच भारत पर अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा भी गहराता जा रहा है। अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया था। आरोप था कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से यूक्रेन युद्ध में रूस को आर्थिक मदद मिल रही है। इसके बाद भारतीय सामानों पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिसमें अतिरिक्त और जवाबी टैरिफ शामिल हैं।
500 फीसदी टैरिफ की आशंका
हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि यह कदम चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने के लिए बेहद प्रभावी साबित होगा।
कूटनीति और व्यापार के रिश्ते
इन तमाम बयानों और फैसलों के बीच यह साफ होता जा रहा है कि भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंध केवल आर्थिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक समीकरणों से भी गहराई से जुड़े हैं। एक फोन कॉल के न होने को लेकर किया गया यह दावा आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों पर क्या असर डालेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।


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