कोर्ट के फैसले से बढ़ीं लालू परिवार की मुश्किलें

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August 8, 2026

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नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   जमीन के बदले नौकरी से जुड़े बहुचर्चित मामले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को अदालत से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती, बेटे तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। अदालत के इस फैसले से यादव परिवार की कानूनी चुनौतियां और गहरी हो गई हैं।

आरोप तय, कई आरोपियों को राहत
विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश विशाल गोगने ने सुनवाई के दौरान कहा कि तत्कालीन रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने अपने पद का दुरुपयोग किया और कथित तौर पर अवैध तरीके से नियुक्तियों को अंजाम दिया। कोर्ट ने इस मामले में कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं, जबकि 52 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। चार्जशीट में नामित 103 आरोपियों में से पांच की मृत्यु हो चुकी है, जिसकी जानकारी सीबीआई पहले ही अदालत को दे चुकी है।

कोर्ट की टिप्पणी: पद का गलत इस्तेमाल
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपों से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि यादव परिवार ने रेलवे के कुछ अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की। यह जमीन कथित तौर पर नौकरी दिलाने के बदले ली गई। न्यायालय ने इसे आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर मामला माना।

किन धाराओं में तय हुए आरोप
मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता अजाज अहमद के अनुसार, अदालत ने लालू प्रसाद यादव, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और हेमा यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत आरोप तय किए हैं। औपचारिक रूप से आरोप 29 जनवरी को तय किए जाएंगे।

क्या है जमीन के बदले नौकरी मामला
सीबीआई के मुताबिक, वर्ष 2004 से 2009 के बीच, जब लालू यादव रेल मंत्री थे, उस दौरान रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र, जबलपुर में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां की गईं। आरोप है कि इन भर्तियों में नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों ने इसके बदले लालू यादव के परिवार या उनके नजदीकी लोगों के नाम पर जमीन ट्रांसफर की या उपहार में दी।

सीबीआई का दावा और अगली कार्रवाई
जांच एजेंसी का कहना है कि इन लेन-देन में कुछ बेनामी संपत्तियां भी शामिल थीं, जो कानूनन अपराध की श्रेणी में आती हैं। अदालत ने सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई और ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी, जिस पर देश की राजनीति की नजरें टिकी रहेंगी।

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